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भारत में ड्रोन उड़ाना हुआ आसान, नियमो में दी गई ढील

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केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय ने देश में ड्रोन परिचालन के लिए भरे जाने वाले आवश्यक प्रपत्रों की संख्या 25 से घटा कर पांच कर और परिचालक से लिए जाने वाले शुल्क के प्रकारों को 72 से घटाकर चार कर परिचालन संबंधी नियमों में राहत दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर कहा कि नए ड्रोन नियम भारत में इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण की शुरुआत करते हैं। उन्होंने कहा कि ये नियम विश्वास और स्व-प्रमाणन पर आधारित हैं। स्वीकृतियां, अनुपालन आवश्यकताओं और प्रविष्टि संबंधी बाधाओं को काफी कम कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इससे इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्ट-अप और युवाओं को काफी मदद मिलेगी। उनके मुताबिक यह इनोवेशन और व्यापार के लिए नई संभावनाएं खोलेगा और को ड्रोन केंद्र बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग में भारत की शक्ति का लाभ उठाने में मदद करेगा।

नई ड्रोन नीति के मुताबिक सभी ड्रोन का ऑनलाइन पंजीकरण होगा। अब पंजीकरण,लाइसेंस के लिए सुरक्षा मंजूरी लेने और ड्रोन के रखरखाव का प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यावसायिक उपयोग के लिए) और नैनो ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

कार्गो डिलिवरी के लिए कॉरीडोर बनाए जांएगे। डीजीसीए ड्रोन प्रशिक्षण आवश्यकताओं को देखेगा और ऑनलाइन पायलट लाइसेंस जारी करेगा। ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षण और परीक्षा ड्रोन स्कूलों में होगी। रिमोट पायलट लाइसेंस शुल्क का शुल्क तीन हजार रुपये (बड़े ड्रोन के लिए) से कम करके सभी श्रेणियों के लिए 100 रुपये कर दी गई है और यह 10 साल के लिए वैध है।

डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ता के अनुकूल सिंगल-विंडो सिस्टम को विकसित किया जाएगा। जिसमें कम से कम मानव दखल होगा। नए नियमों के तहत ड्रोन का अधिकतम वजन 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है।  इससे ड्रोन टैक्सियों को भी ड्रोन नियमों के दायरे में लाना आसान होगा।