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DCGI ने विदेशी वैक्सीन कंपनियों से हटाई ट्रायल की शर्त, इन vaccines का जल्द हो सकता है भारत में आगमन

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कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया देश में पिछले कुछ महीने से चल रही है। जरूरत ज्यादा और उत्पादन कम होने की वजह से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया धीमी हो गयी थी। जून के शुरूआत से इस प्रक्रिया में तेज़ी आयी है। हालांकि, अभी भी देश की महज 15% आबादी ऐसी है जिसे वैक्सीन की कम से कम एक डोज लगी है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कई विदेशी वैक्सीन को भारत में ट्रायल की शर्त खत्म कर दी है। इस फैसले से वैक्सीनेशन की रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद है।

भारत सरकार का दावा है कि दिसंबर 2021 तक 216 करोड़ वैक्सीन के दोज उपलब्ध होंगे और पूरी आबादी के वैक्सीनेटेड होने की उम्मीद भी जताई गई है। सरकार ने कहा है कि साल के अंत तक भारतवासियों के पास 8 टीकों (Vaccines) का ऑप्शन उपलब्ध होगा। फिलहाल भारत में तीन प्रकार के टीके ही उपलब्ध हैं – कोवैक्सिन, कोवीशील्ड और स्पुतनिक-V.

देश में वैक्सीन की तत्कालीन हालत

फिलहाल हमारे देश में बड़े पैमाने पर दो वैक्सीन ही इस्तेमाल हो रही हैं। इसमें कोवैक्सिन देश में बनी है। इसे भारत बायोटेक ने बनाया है। वहीं, ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोवीशील्ड को भारत में सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है।

रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V को भारत में डॉक्टर रेड्डीज लैब बना रही है। हालांकि, ये वैक्सीन अभी सिर्फ कुछ प्राइवेट अस्पतालों में ही मिल रही है। इसके जल्द ही हर जगह उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। DCGI के फैसले से फाइजर और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन के देश में आने का रास्ता आसान हुआ है। अगर देश के वैक्सीनेशन प्रोग्राम की बात करें तो अब तक 25 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दी जा चुकी है।

DCGI के शर्त हटाने के बाद कौन-कौन सी वैक्सीन भारत आ सकती है?

DCGI के ट्रायल की शर्त के खत्म होने के बाद भारत में अन्य देशों की वैक्सीन के आने का रास्ता आसान हुआ है। भारत सरकार ने कहा है कि अमेरिकी रेगुलेटर USFDA, यूरोपीय संघ के रेगुलेटर EMA, यूके के रेगुलेटर UK MHRA, जापान के रेगुलेटर PMDA और WHO की ओर से लिस्टेड इमरजेंसी यूज लिस्टिंग में शामिल वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया जाएगा।

इस समय अमेरिका में मॉडर्ना, फाइजर के साथ सिर्फ जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को अप्रूवल मिला हुआ है। इसी तरह यूरोपीय संघ में इन तीन के अलावा एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को अप्रूवल दिया गया है। UK में फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगाई जा रही है। जापान में सिर्फ फाइजर की वैक्सीन लगाई जा रही है। बता दें, WHO ने अब तक सिर्फ चार वैक्सीन को मंजूरी दी है। जो हैं- फाइजर, एस्ट्राजेनेका, सीनोफॉर्म और सिनोवैक।

भारत में फाइजर, मॉडर्ना, सिनोफॉर्म, सिनोवैक और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इन वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी अप्रूवल मिल सकता है। हालांकि, चीनी वैक्सीन सिनोवैक और सिनोफॉर्म की मंजूरी में अड़चन आने की संभावना है।

भारत में कौन सी वैक्सीन है WHO से अप्रूव्ड?

भारत में सबसे पहले अप्रूव होने वाली विदेशी वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका है। इसका इस्तेमाल भारत में कोवीशील्ड के नाम से किया जा रहा है। कोवीशील्ड की एफिकेसी 71% है। WHO, UK हेल्थ केयर बोर्ड, यूरोपियन मेडिकल यूनियन के साथ ही दुनिया के कई देशों में इस वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। कई देशों में इसे कोवीशील्ड तो कई जगह वैक्सजेवरिया के नाम से बेचा जा रहा है। भारत में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसे बना रही है।

कोवीशील्ड के बाद देश में मंजूरी पाने वाली दूसरी विदेशी वैक्सीन रूस की स्पुतनिक-V है। स्पुतनिक-V को रूस ने अगस्त 2020 में इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दी थी। ये कोरोना के खिलाफ मंजूर हुई दुनिया की सबसे पहली वैक्सीन में से एक है। भारत में इस वैक्सीन को इस साल फरवरी में इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी मिली है।

सबसे पहले भारत आ सकती है जॉनसन एंड जॉनसन

भारत में जिन विदेशी वैक्सीन को अप्रूवल मिलने की उम्मीद है, उनमें सबसे पहले जॉनसन एंड जॉनसन के भारत में उपलब्ध होने के आसार हैं। कंपनी ने इसके लिए हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल E से करार किया है। स्पुतनिक लाइट की तरह ये भी एक सिंगल डोज वैक्सीन है । J&J की वैक्सीन ट्रायल्स में 66% इफेक्टिव साबित हुई है। सरकार के फैसले के बाद यह वैक्सीन सबसे जल्दी उपलब्ध होने वाली वैक्सीन में शामिल होगी। बायोलॉजिकल E के पास इसके सालाना 60 करोड़ डोज बनाने की क्षमता है। अमेरिका ने हाल ही में इस वैक्सीन को अपने यहां इस्तेमाल की मंजूरी दी है।

मॉडर्ना को भी मिल सकता है अप्रूवल

मॉडर्ना भी फाइजर की तरह mRNA बेस्ड वैक्सीन है | इस वैक्सीन की दुनियाभर में मांग है। भारतीय दवा कंपनी सिप्ला मॉडर्ना के साथ पार्टनरशिप कर भारत में इस वैक्सीन को बना सकती है। मॉडर्ना की वैक्सीन अगले साल की शुरुआत तक आने की संभावना है। मॉडर्ना की एफिकेसी 94% है।

चीनी वैक्सीन को अप्रूवल मिलने में क्यों आ सकती है अड़चन ?

WHO ने 7 मई को चीनी वैक्सीन सिनोफॉर्म को मंजूरी दी । करीब एक महीने बाद एक और चीनी वैक्सीन को मंजूरी मिली। 1 जून को WHO ने सिनोवैक को मंजूरी दी थी। भारत सरकार ने जिन वैक्सीन्स को भारत में डायरेक्ट अप्रूवल की मंजूरी दी है, उनमें चीन शामिल नहीं है, लेकिन WHO शामिल है। ऐसे में देखना होगा कि भारत में इन दोनों वैक्सीन को मंजूरी मिलती है या नहीं।