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Cyclone Yaas : भगवान भी मूड में हैं, भेज रहे हैं एक और मौत का सामान, बिहार पे भी मंडरा रहा है खतरा

yasa cyclone
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कोरोना महामारी के कहर के साथ-साथ हमें अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों ही अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान ‘ताऊते’ (Taukte) तबाही मचाता अपने पीछे बर्बादी का मंजर छोड़ता भारत के पश्चिमी तटों को छू कर निकला है। ताऊते तूफान अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है। भारत अभी उससे हुए नुकसान से उबर भी नहीं पाया है कि दूसरी ओर से एक और तूफान सिर उठा रहा है।

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने.. एक और चक्रवाती तूफान भारत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है.. अंडमान द्वीप (Andaman) के उत्तरी भाग की ओर पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में एक चक्रवाती तूफान बन रहा है। इस बात की जानकारी मौसम विभाग ने दी है। मौसम विभाग के अनुसार 22 मई को पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर और 23 मई को डिप्रेशन शुरू होगा। यह प्रक्रिया 24 से 25 मई तक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा।

बंगाल की खाड़ी में उठ रहे इस चक्रवाती तूफान को ओमान ने ‘यास’ (Cyclone Yaas) नाम दिया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 मई की शाम से ओडिशा, पश्चिम बंगाल में बारिश शुरू हो जाएगी । ‘यास’ एक उर्दू शब्द है जिसका अर्थ ‘निराशावादिता’ होता है।

चक्रवात क्या है?

कम वायुमंडलीय दवाब के चारों ओर गर्म हवा की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं। दक्षिणी गोलार्ध में इन गर्म हवा को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये घड़ी की सुई के साथ यानी clock wise direction में चलते हैं। उत्तरी गोलार्ध में इन गर्म हवा को हरीकेन या टाइफून कहते हैं। ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में यानी anti clock wise चलते हैं।

कैसे बनते हैं चक्रवाती तूफान?

गर्म इलाके के समुद्र में मौसम की गर्मी से हवा गर्म होकर बहुत कम हवा के दबाव का क्षेत्र बनाती है। हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर आती है और ऊपर की नमी से मिलकर संघनन यानी कि गैस से लिक्विड फॉर्म में बदलने की प्रक्रिया से बादल बनाती है। गरम हवा के तेज़ी से ऊपर जाने की वजह से बने खाली जगह को भरने के लिए नमी वाली हवा तेजी से नीचे जाकर ऊपर आती है। जब हवा बहुत तेजी से उस क्षेत्र के चारों तरफ घूमती है तो घने बादलों और बिजली के साथ मूसलाधार बारिश करती है। तेज घूमती इन हवा के क्षेत्र का डायमीटर हजारों किलो मीटर हो सकता है।

भारत के एक तरफ अरब सागर सागर है वहीं पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी। यहाँ उठने वाले चक्रवाती तूफान भारत को काफी प्रभावित करते हैं। भारत के तटवर्ती इलाके खासकर ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश ,पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक महाराष्ट्र और गोवा चक्रवाती तूफान से ज्यादा प्रभावित होते हैं।

मई-जून में चक्रवाती तूफान आना आम बात है। ज्यादातर चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में उठते हैं। पिछले 120 साल में आये सभी चक्रवाती तूफान के 14% ही भारत के पास के अरब सागर में आए हैं। बंगाल की खाड़ी में उठने वालों की तुलना में अरब सागर के चक्रवाती तूफ़ान अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं।जब अरब सागर में उठे चक्रवाती तूफान ताऊते ने हाल में ही इतनी तबाही मचाई है तो आप सोच सकते हैं बंगाल की खाड़ी में उठ रहा तूफान यास कितनी तबाही मचाएगा।

इन तूफानों का नाम कैसे रखा जाता है?

विश्व मौसम संगठन और संयुक्त राष्ट्र की प्रशांत एशियाई क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक आयोग की चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत चक्रवात का नाम रखा जाता है। आठ उत्तरी भारतीय समुद्री देश बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, और थाईलैंड एक साथ मिलकर आने वाले चक्रवाती तूफ़ान के 64, हर देश आठ नाम नाम तय करते हैं। जब चक्रवात इन आठों देशों के किसी हिस्से में पहुंचता है, सूची से अगला दूसरा सुलभ नाम रख दिया जाता है।

इन आठ देशों की ओर से सुझाए गए नामों के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया जाता है और उसके हिसाब से ही चक्रवाती तूफान के नाम रखे जाते हैं। साल 2004 में चक्रवाती तूफान के नामकरण की यह प्रकिया शुरू की गई है।

बंगाल की खाड़ी में उठ रहे चक्रवाती तूफान के बारे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि एक cyclonic circulation बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में औसत समुद्र तल से 3.1 किमी और 5.8 किमी की ऊँचाई पर बन रहा है।

आम तौर पर मानसून से पहले के महीने , अप्रैल-मई पूर्वी और साथ ही पश्चिमी तट पर चक्रवातों का निर्माण करते हैं। मई 2020 में दो चक्रवात देखे गए – सुपर चक्रवाती तूफान अम्फान और गंभीर चक्रवाती तूफान निसारगा – जो क्रमशः पूर्वी और पश्चिमी तट से टकराये थे।

अब बात आती है कि अगर ‘यास’ विकराल रूप लेता है तो किन क्षेत्रों में ज्यादा तबाही मचा सकता है..

इस तूफान के चपेट में ओडिसा, पश्चिम बंगाल, मेघालय और असाम के आने की सबसे अधिक संभावना पिछले साल आये चक्रवाती तूफान अम्फान ने बंगाल में काफी तबाही मचाई थी। तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। मछुआरों को 21 मई के बाद समुन्द्र में ना जाने को कहा गया है और जो भी समुन्द्र में हैं उन्हें 23 मई तक लौटने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

अरब सागर में उठे ताऊते चक्रवाती तूफान का असर उत्तर-पश्चिमी भारत में भी देखने को मिल रहा है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली और उस के आस-पास के क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। बिहार में भी मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। 19 मई की रात से कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। जहाँ अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है वहीं बंगाल की खाड़ी में उठ रहा चक्रवाती तूफान धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।

बंगाल की खाड़ी में उठ रहे चक्रवाती तूफान से तबाही का अब कैसा खौफनाक मंजर देखने को मिलने वाला है ये कहना मुश्किल है। ऐसे में हम यही कहेंगे अपना और अपनों का ध्यान रखें और सुरक्षित रहें।

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