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आत्मनिर्भर भारत का एक और उदाहरण, DRDO ने स्वदेशी मिसाइलों का किया सफल परीक्षण

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”आत्मनिर्भर भारत” को बढ़ावा देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बुधवार को दो स्वदेशी मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। इनमें से एक जमीन से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी) और दूसरी कम वजन वाली, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) है।

आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में छठा एमपी-एटीजीएम मिसाइल का परीक्षण

स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन वाली मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MP-ATGM) का आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में छठा परीक्षण किया गया। मिसाइल ने लक्ष्य बनाकर रखे गए टैंक पर सटीक हमला कर उसे नष्ट कर दिया। इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता बना दिया है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है। साथ ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने टीम को सफल परीक्षण के लिए बधाई दी।

परीक्षण में भी खरी उतरी मिसाइल

डीआरडीओ (DRDO) ने एक बयान में कहा कि आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और भारतीय सेना को मजबूत करने के लिए मिसाइल को थर्मल साइट के साथ मैन पोर्टेबल ट्राइपॉड से दागा गया और इसके निशाने पर एक नकली सक्रिय टैंक था। मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में लक्ष्य को निशाना बनाया और इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इस दौरान मिशन के सभी उद्देश्य हासिल किए गए। डीआरडीओ ने कहा कि परीक्षण के दौरान इस मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा कर लिया गया। इस मिसाइल का अधिकतम सीमा तक उड़ान का परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मिसाइल को उन्नत एवियोनिक्स के साथ अत्याधुनिक लघु इन्फ्रारेड इमेजिंग तकनीक के साथ लैस किया गया है।

सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मिसाइल हासिल करने का रास्ता साफ

‘दागो और भूल जाओ’ की तकनीक वाली इस पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का यह छठा सफल परीक्षण था। इस परीक्षण ने सेना के लिए तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी मैन पोर्टबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हासिल करने का रास्ता तैयार कर दिया है। इस परीक्षण ने मिसाइल की न्यूनतम सीमा को सफलतापूर्वक सत्यापित किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है।

मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के बारे में…

यह तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) नाम से निकाली गई मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसका विकास भारतीय कंपनी वीईएम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की साझेदारी में डीआरडीओ ने किया है। एटीजीएम कम वजन वाली लंबी बेलनाकार मिसाइल है, जिसके मध्य भाग के चारों ओर चार पंखों का समूह होता है। इसे उच्च-विस्फोटक एंटी-टैंक वारहेड के साथ लगाया गया है। इस मिसाइल की लंबाई लगभग 1,300 मि.मी. है और वजन कम रखने के लिए एल्यूमीनियम और कार्बन फाइबर लॉन्च ट्यूब के साथ लगभग 120 मि.मी. का व्यास रखा गया है।

एमपीएटीजीएम मिसाइल का कुल वजन 14.5 किलोग्राम और इसकी कमांड लॉन्च यूनिट (सीएलयू) का वजन 14.25 किलोग्राम है, जो लेजर ऑल-वेदर को डिजिटल ऑल-वेदर के साथ जोड़ती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 2.5 किमी है। इसके अब तक पांच परीक्षण किए जा चुके हैं। पहला और दूसरा परीक्षण 15 और 16 सितम्बर, 2018 को सफलतापूर्वक किया गया। इसके बाद तीसरा और चौथा सफल परीक्षण 13-14 मार्च, 2019 को राजस्थान के रेगिस्तान में किया गया। 11 सितम्बर, 2019 को आंध्र प्रदेश के कुर्नूल में मिसाइल का फिर से परीक्षण किया गया। इसमें एक मैन पोर्टेबल ट्राइपॉड लॉन्चर का उपयोग किया गया। परीक्षण का लक्ष्य एक डमी टैंक था, जिसे मिसाइल ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।

आकाश-एनजी (न्यू जेनरेशन) मिसाइल के बारे में…

वहीं, डीआरडीओ ने बुधवार को सुपरसोनिक आकाश-एनजी (न्यू जेनरेशन) मिसाइल का दूसरा सफलतापूर्वक परीक्षण एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर), चांदीपुर, ओडिशा तट से किया। आकाश मिसाइल की अगली पीढ़ी आकाश-एनजी की मारक क्षमता 40-50 कि.मी. तक है। 96 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह देश का सबसे महत्वपूर्ण मिसाइल सिस्टम है, जिसे अब दूसरे देशों को भी निर्यात करने की मंजूरी सरकार से मिल चुकी है।

आकाश मिसाइल सिस्टम खरीदने में अब तक 9 देशों ने दिखाई दिलचस्पी

आकाश मिसाइल सिस्टम को खरीदने में पूर्वी एशिया और अफ्रीका के 9 देशों ने दिलचस्पी दिखाई है। आकाश-एनजी (न्यू जेनरेशन) का पहला परीक्षण इसी साल 25 जनवरी को किया गया था। डीआरडीओ ने बुधवार को ओडिशा के तट से इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से आकाश-एनजी (न्यू जेनरेशन) मिसाइल का दूसरा सफल प्रक्षेपण किया। मिसाइल को इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य को नष्ट करने के लिए दोपहर 2.30 बजे लॉन्चिंग कॉम्प्लेक्स-III के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में एक मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया गया था। सफल परीक्षण के बाद डीआरडीओ ने कहा कि परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया। कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का प्रदर्शन, ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और मिसाइल के वायुगतिकीय विन्यास को सफलतापूर्वक सत्यापित किया गया।

इन खतरों से निपटने के लिए होगा आकाश-एनजी मिसाइल का इस्तेमाल

आकाश-एनजी नई पीढ़ी की सतह से हवा में हमला करने वाली इस मिसाइल का उपयोग भारतीय वायुसेना द्वारा उच्च पैंतरेबाजी वाले हवाई खतरों को रोकने के उद्देश्य से किया जाता है। सरकार से आकाश-एनजी विकसित करने के लिए सितम्बर, 2016 में मंजूरी मिली थी। नई पीढ़ी की आकाश-एनजी यूएवी, विमान और मिसाइल जैसे लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है। आकाश-एनजी में दुश्मन को जवाब देने के लिए बेहतर टाइमिंग और हमलों के खिलाफ उच्चस्तर की सुरक्षा करने की क्षमता होगी। इसकी मौजूदा मारक क्षमता 40 किमी. से बढ़ाकर 80 किमी से अधिक करने के लिए सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है।