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Happy Mother’s Day : मां, एक शब्द या पूरा ब्रह्मांड

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Nidhi Tiwary

माँ…
सर पर जो हाथ फेरे,
तो हिम्मत मिल जाये…
माँ एक बार मुस्कुरा दे,
तो जन्नत मिल जाये..!

मां, मम्मी, आई, मदर, अम्मी और ना जाने क्या-क्या। लेकिन क्या यह एक शब्द है या फिर एक शब्द में पूरा ब्रह्मांड छिपा है। कहते हैं एक औरत का तीन जन्म होता है- पहला जन्म बेटी के रूप में अपने मायके में, दूसरा जन्म बहू के रूप में उसके ससुराल में और तीसरा जन्म जहां औरतों को पूर्ण माना जाता है वह है मां बनना।

बेटी से बहू बनने तक का सफर आसान तो नहीं कह सकते लेकिन बहू से मां बनने का सफर और उस सफर पर जिंदगी भर चलते रहने से थोड़ा आसान जरुर है। जहां एक औरत को पहले जन्म में हर वक्त अपने घर अपने पिता अपने परिवार की इज्जत को आगे रखना पड़ता है, दूसरे जन्म यानी बहू बनने के बाद अपने माई के और अपने ससुराल दोनों की इज्जत का भाग दौड़ उसके कंधे पर आ जाता है। लेकिन जब वही बेटी बहू मां बनती है तो उसे दोनों परिवारों की इज्जत सम्मान खुशियों के साथ साथ अपने बच्चे के लिए उसके ढाल के रूप में हर वक्त हर रूप में साथ रहना पड़ता है।

जो मां अपने बच्चे के लिए पीपल की छांव बन कर उसके साथ चलती है वही मां अपने बच्चे की रक्षा के लिए दुर्गा और काली का रूप भी धारण करती है। और शायद इसीलिए मां को सृष्टि रचयिता के स्थान पर रखा जाता है और इन्हें भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया जाता है।

‘मां’ कहते हैं दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द है और जब बच्चा बोलना शुरू करता है तो सबसे पहला शब्द मां ही बोलता है। इसी मां के सम्मान में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है। इसे हर जगह अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। कहीं माओं को पूजा जाता है, तो कई जगहों पर उस दिन अवकाश दिया जाता है।

आइए आपको बताते हैं मदर्स डे (Mothers Day) के इतिहास के बारे में:

कहते हैं कि मदर्स डे सेलिब्रेट करने की शुरुआत ग्रीस से हुई है। ग्रीस के लोग अपनी माताओं के प्रति विशेष सम्मान रखते थे। इस सम्मान को दर्शाने के लिए वे इस दिन उनकी पूजा करते थे। मान्यताओं के अनुसार स्यबेले ग्रीक देवताओं की मां थीं। और ग्रीस के लोग आज ही के दिन स्यबेले की पूजा किया करते थे। इस प्रकार से इतिहास में यह ऐसी पहली घटना मिलती है, जहां पर किसी खास दिन माओं के प्रति सम्मान दिखाने की शुरुआत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे माताओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने की यह परंपरा दुनिया के अन्य देशों में भी फैल गई।

एक और इतिहास के अनुसार वर्जिनिया में मदर्स डे सेलिब्रेट करने की शुरुआत एना जार्विस नाम की महिला ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने शादी नहीं की थी और ना ही उनका कोई बच्चा था। एना अपनी मां से बहुत प्रेरित थीं और उनसे बेहद प्यार करती थीं। मां की मृत्यु के बाद उन्होंने उनके प्रति अपना सम्मान दिखाने के लिए मदर्स डे सेलिब्रेट करने की शुरुआत की। बता दें कि क्रिश्चियन इस दिन को वर्जिन मेरी का दिन मानते हैं। इस दिन वे लोग उन्हें फूल और गिफ्ट्स देकर उनकी प्रेयर करते हैं। जानना दिलचस्प है कि यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है।

हमारे देश में तो दुर्गा हो या आम औरत सबों को मां का दर्जा दिया जाता है। चाहे वह भगवान गणेश की मां पार्वती हो या किसी आम जनक की मां। हमारे देश में सभी के पास अपना खुद का जन्नत है, वह है हमारी मां के कदमों में।

क्या लिखू अपनी माँ के बारे मे मैं, जब मैं खुद ही उनकी लिखावट हूँ।