इवेंट

एक साथ होगा ब्लू मून और रेड मार्स का दीदार, जानें क्यों है खास

MOON AND MARS
Spread It

इस 31 अक्टूबर को हमें नीला चांद और लाल ग्रह का दीदार होने वाला है। लाल ग्रह, दो वर्षों में पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचता है जो पूर्णिमा वाले चांद के पास आकाश में दिखाई देगा। जब यह घटना होती है तो रंग के कारण इसे ‘ब्लू मून’ नहीं कहा जाता है। एक पूर्णिमा और अगले के बीच का समय एक कैलेंडर माह की लंबाई के करीब है। इसलिए, जब एक महीने में दो पूर्ण चंद्रमा होते हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। ऐसा हर दो से तीन साल में होता है। इस परिभाषा के मुताबिक अंतिम ब्लू मून 31 मार्च 2018 को हुई थी।

यह पूर्णिमा का क्षण 31 अक्टूबर को 14:49 UTC पर आएगा, जो IST में रात 8.15 बजे के आसपास है। तो भारत में नीला चाँद उस समय के आसपास दिखाई देगा। यह एक माइक्रो-मून भी है क्योंकि यह 2020 में सबसे दूर (और सबसे छोटा) पूर्णिमा का चांद भी है। कभी-कभी, हालांकि, चंद्रमा नीला दिखता है, लेकिन यह वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण होता है और कैलेंडर समय के साथ कोई लेना देना नहीं है।

इस सप्ताह हम चंद्रमा को उजागर करेंगे क्योंकि यह इस महीने दूसरी बार अपोजिशन में पहुंचेगा। चंद्रमा के लिए अपोजिशन को हम आम तौर पर पूर्णिमा कहते हैं। हैलोवीन पर पूर्ण चांद लगभग हर 19 साल में होता है। इस चक्र को Metonic Cycle कहा जाता है जिसके दौरान 19 tropical वर्ष और 235 synodic महीने होते हैं। हर 19 वर्ष में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच एक विशेष geometry के कारण यह स्थितियाँ दोहराती हैं।

“ब्लू मून” का चंद्र शब्द पहली बार 1930 के दशक के Maine किसानों के पंचांग में दिखाई दिया था। यह एक मौसम में चार पूर्ण चंद्रमाओं की घटना के रूप में एक ब्लू मून को परिभाषित करता है। यदि ऐसा होता है तो तीसरा पूर्णिमा का चांद ब्लू मून कहलायेगा। बाद में एक लेखक द्वारा 1946 के ‘स्काई और टेलिस्कोप’ के एक लेख में इसे गलत व्याख्या की गई जिसने ब्लू मून को एक महीने की दूसरी पूर्णिमा चांद के रूप में बताया। गलत व्याख्या लोकप्रिय बनी रही और अधिकांश आधुनिक ऑब्जर्वर्स के दिमाग में रही। इस वर्ष नीला चांद देखने के बाद, हमें अगले नीले चांद को ठीक से देखने के लिए 31 अक्टूबर 2039 तक इंतजार करना होगा।

Add Comment

Click here to post a comment