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Railway Recruitment : रेलवे में 3 लाख से ज्यादा पद खाली, साढ़े तीन साल से लटकी NTPC और Group D की बहाली

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PATNA : देश में बेरोजगारी का आलम दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. भारी संख्या में युवक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं. लेकिन ऐसी बात नहीं है कि राज्य या केंद्र सरकार के विभागों में नौकरी नहीं है. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के सांसद सुशील कुमार मोदी के हवाले से एक बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल सुशील कुमार मोदी के माध्यम से ये पता चला है कि भारतीय रेल (Railway) में तीन लाख से ज्यादा पद खाली हैं.

दरअसल नीतीश मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा दिनों तक डिप्टी सीएम के रूप में काम करने वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने राज्यसभा में सरकार पांच बिन्दुओं पर जानकारियां मांगी थीं. जिसमें रेलवे में कितने पद खाली हैं. इसपर भी सवाल किया गया था. रेल मंत्रालय की ओर से अब जो जानकारी सामने आई है. वह वाकई में देश के युवाओं के लिए विडंबना की बात है. क्योंकि देश में बेरोजगारी और रेलवे में रिक्त पदों की संख्या एक दूसरे के समानांतर बढ़ रही हैं.

रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़े के अनुसार देश में सबसे अधिक सरकारी नौकरी रेलवे के माध्यम से आती है और आज की तारीख में सबसे ज्यादा पद इसी विभाग में खाली हैं. रेलवे में एक फरवरी 2020 के अनुसार कुल 3 लाख 1 हजार 413 पद खाली हैं. जबकि पिछले पांच सालों की बात की जाये तो कुल मिलाकर 2 लाख 60 हजार 11 रेल कर्मचारी रिटायर हुए हैं.

साल दर साल अगर बात की जाये तो वर्ष 2019 में 62 हजार 940, वर्ष 2020 में 62 हजार 282, वर्ष 2021 में 56 हजार 797 रेल कर्मी सेवानिवृत हुए हैं. जबकि इस साल 2022 में 41 हजार 431 और अगले साल 2023 में कुल 36 हजार 561 रेल कर्मी रिटायर होने जा रहे हैं. ये रेलवे द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़े हैं. फिलहाल रेलवे में 15 लाख 6 हजार 299 कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें 17 हजार 894 राजपत्रित और 14 लाख 88 हजार 405 अराजपत्रित कर्मी शामिल हैं.

आपको बता दें कि वर्तमान में आरआरबी द्वारा 1 लाख 40 हजार 731 रिक्तियां तीन केन्द्रीकृत रोजगार अधिसूचना के माध्यम से भरी जानी है. इसमें ग्रुप डी और एनटीपीसी की बहाली भी शामिल है, जिसकी भर्ती प्रक्रिया लगभग साढ़े तीन साल से लटकी हुई है. हाल ही में हुए रेलवे अभ्यर्थियों का आंदोलन उनके संयम का टूटने का सबसे बड़ा उदाहरण था, जो बिहार में हुआ, उसे पूरे देश ने देखा.

गौरतलब है कि बिहार से भारी संख्या में युवाओं ने रेलवे में भर्ती के लिए आवेदन किया है. देश में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक आवेदन बिहार से होते हैं. इसलिए रेलवे भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी का असर भी सबसे ज्यादा बिहार में ही देखने को मिला, जहां बेरोजगार छात्रों ने ट्रेनों में आग लगा दी. तो वहीं कुछ स्टेशनों पर तोड़फोड़ भी किया गया.

अब इस बहाली में एक और बदलाव करते हुए सरकार ने मात्र उतने ही बच्चों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाने का फैसला किया है, जितने पदों पर बहाली होने वाली है. इससे पहले सरकार ने मूल विज्ञापन में विज्ञप्तित रिक्त पद से डेढ़ गुना ज्यादा बच्चों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाने का फैसला लिया था.

रेल मंत्रालय ने भाजपा सांसद सुशील मोदी को रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी भी साझा किया है. उन्होंने बताया है कि रेलवे के अलग-अलग जोन को मिलाकर तीन लाख से अधिक पद रिक्त हैं. सबसे अधिक रिक्त पदों की संख्या उत्तर रेलवे में 37 हजार 433 के करीब है. इसके बाद मध्य रेलवे में 27 हजार 482 और पश्चिम रेलवे में 26 हजार 351 पद रिक्त हैं.

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने रेल मंत्रालय से पांच बिन्दुओं पर जानकारियां मांगी थीं. इनमें रेलवे की प्रत्येक श्रेणी के कुल स्वीकृत पद, जोनवार रिक्तियों की संख्या, पिछले तीन वर्षों में रेलवे की ओर से की गई भर्तियां, तीन वर्षों में सेवानिवृत्त कर्मियों की संख्या और एक साल में कितने कर्मी सेवानिवृत्त होंगे, इसकी जानकारी मांगी गई थी. इन सभी बिन्दुओं पर रेल मंत्रालय की ओर से जवाब दिया गया है.

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