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क्यों मनाया जाता है World Television Day, आइये जानते हैं भारत में कैसे आया टेलीविजन?

World Television Day
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DESK : टेलीविजन को 20वीं सदी के महानतम आविष्कारों में से एक जाना जाता है। टेलीविज़न मतलब “घर बैठे संसार दर्शन”, यानी आप घर बैठे ही दुनिया की सभी तरह की घटनाओ एवं जानकारियों को वीडियो माध्यम में देख सकते हैं। यह हमारे घर का अहम् हिस्सा बन चुका है। 21 नवंबर 1996 को विश्व टेलीविजन दिवस (World Television Day) के रूप में घोषित करके संयुक्त राष्ट्र ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता के स्तंभ का जश्न मनाया।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि टेलीविजन “समकालीन दुनिया में संचार और वैश्वीकरण के लिए एक प्रतीक का प्रतिनिधित्व करता है।” टेलीविजन ना केवल दुनिया भर में लोगों और देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ा सकता है, बल्कि यह उन लोगों को भी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है जिनको आवश्यकता होती है।

18 दिसंबर 1996 को, 51वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 नवंबर को पहले विश्व टीवी मंच की तारीख को विश्व टेलीविजन दिवस के रूप में निर्धारित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, ताकि दुनिया के मीडिया उद्योग के विकास को बढ़ावा दिया जा सके और टेलीविजन उद्योग को विश्व शांति और मानव समाज के विकास को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाय। टेलीविजन आधुनिक दुनिया में संचार और वैश्वीकरण का प्रतीक है।

विश्व टेलीविज़न डे का इतिहास
इस महत्वपूर्ण दिवस जानकारी हमें 21 नवंबर और 22 नवंबर, 1996 को ज्ञात हुआ जब संयुक्त राष्ट्र ने पहला टेलीविज़न आयोजित किया जिसमे मीडिया के आंकड़ों को टीवी के महत्त्व को पूरा करने और चर्चा करने की अनुमति दी, ना केवल जानकारी देने में बल्कि दुनिया को बदलने में भी। आधुनिक युग में टेलीविज़न हमें सम्पूर्ण विश्व का संघर्षों और समस्याओं पर दुनिया का ध्यान केंद्रित करके सुरक्षा और शांति के लिए सभी जगह टेलीविजन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

टेलीविज़न का इतिहास
टेलीविज़न का खोज 1925 इसवीं में हुई थी हालाँकि इसे भारत में आने में करीब 30 वर्ष लगे और यह भारत में इसकी शुरुआत सितंबर 1959 में हुई। आधुनिक समय में टेलीविज़न 24 घंटे सातों दिन चलती है, वही शुरूआती दौर में टेलीविज़न सप्ताह में सिर्फ दो दिन वो भी एक एक घंटे के लिए प्रसारित की जाती थी। भारत में इसका प्रसारण ‘ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio)’ के अंतर्गत शुरू हुआ था। लेकिन 1976 में यह एक स्‍वतंत्र विभाग बना और देश के कई हिस्‍सों में टेलीविजन केंद्र भी खोले गए।

टेलीविज़न जैसी तकनीक का विकास निरंतर माध्यम में हुआ है ,वही जॉन लॉगी बेयर्ड को इसका खोजकर्ता मन जाता हैं , यही वजह है कि उन्‍हें ‘फादर ऑफ टेलीविजन (Father of Television)’ के तौर पर भी जाना जाता है। टीवी आज हमारे जीवन का अहम हिस्‍सा बन गया है और यह हमें कई तरह से प्रभावित करता है। यह हमारे रहन-सहन और सोचने तक के तरीके पर असर डालता है। लोग इसे देखते हुए काफी वक्‍त बिता रहे हैं तो इस बारे में एक अहम व दिलचस्‍प तथ्‍य यह भी है कि औसतन एक इंसान अपनी जिंदगी के तकरीबन 10 साल टीवी देखते हुए बिता देता है।

भारत में कैसे आया टेलीविजन?
टीवी की खोज का साल अक्‍टूबर 1925 माना जाता है और इस तरह यह 96 वर्ष का हो चुका है और शतक पूरा करने से महज चार वर्ष दूर है। हिंदी में इसे दूरदर्शन कहा जाता है, क्‍योंकि इसमें दूर के किसी व्‍यक्ति या वस्‍तु की गति करती हुई तस्‍वीर हमारे सामने होती है। भारत में इसकी शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर सितंबर 1959 में हुई थी। तब सप्‍ताह में महज दो बार एक-एक घंटे के कार्यक्रम का प्रसार टीवी पर हुआ करता था।

मौजूदा दौर में जहां टीवी 24X7 चल रहा है, वहीं किसी ऐसे दौर की कल्‍पना भी मुश्किल लगती है, जब टीवी सप्‍ताह में दो दिन महज एक-एक घंटे के लिए चलता था। लेकिन भारत में शुरुआत के वर्षों में यही स्थिति थी। भारत में इसका प्रसारण ‘ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio)’ के अंतर्गत शुरू हुआ था। लेकिन 1976 में यह एक स्‍वतंत्र विभाग बना और देश के कई हिस्‍सों में टेलीविजन केंद्र भी खोले गए।

इसके बाद तो टीवी के विकास का निरंतर सिलसिला चल पड़ा और 1997 में इस दिशा में बड़ा कदम तब सामने आया, जब प्रसार भारती का गठन किया गया। टीवी आज हमारे जीवन का अहम हिस्‍सा बन गया है और यह हमें कई तरह से प्रभावित करता है। यह हमारे रहन-सहन और सोचने तक के तरीके पर असर डालता है। आज जब टीवी 24X7 संचालित हो रहा है और लोग इसे देखते हुए काफी वक्‍त बिता रहे हैं तो इस बारे में एक अहम व दिलचस्‍प तथ्‍य यह भी है कि औसतन एक इंसान अपनी जिंदगी के तकरीबन 10 साल टीवी देखते हुए बिता देता है।

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