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Corona काल में नौकरी गई तो इस प्रवासी मजदूर ने खोल ली अपनी कंपनी, देखिये Video

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DESK : कोरोना महामारी (Corona) ने पिछले करीब डेढ़-दो सालों में पूरी दुनिया की कमर तोड़ कर रख दी है. विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देशों की भी इस महामारी ने हालत खस्ता कर दी है. इस वैश्विक महामारी की मार सबसे ज्यादा निचले तबके और मजदूर वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ी है. विशेषकर बिहार के मजदूरों को भी कोरोना काल में काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है. लेकिन कहते हैं न कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है. यह बात आज बिहार में सार्थक साबित हो रही है… देखिये Video

आज हम आपको बिहार के एक ऐसे प्रवासी मजदूर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने कमाल कर दिया है. कहानी कटिहार के रहने वाले प्रवासी मजदूर रोशन राज की है, जिन्होंने सचमुच अपने नाम को रोशन से रौशन कर दिया. दरअसल कोरोना काल में नौकरी गंवाने वाले प्रवासी मजदूर रोशन राज ने खुद का एक स्टार्टअप शुरू किया है, जो अन्य प्रवासी मजदूरों के लिए प्रेरणादायक है. कोरोना जैसी मुश्किल घड़ी को अपनी सूझबूझ से कटिहार के रहने वाले एक मजदूर ने अपनी जीविका को बेहतर बनाने का साधन बना लिया. जो नौकरी आपदा में चली गई, उससे बेहतर रोजगार रोशन ने अपने बूते, अपने पैरों पर खड़ा कर लिया.

गौरतलब है कि कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में लाखों लोगों की नौकरी चली गई. उन लाखों लोगों में कटिहार के रोशन राज भी थे. कभी अपने परिवार का और अपना पेट पालने के लिए परदेश में मजदूरी करने को विवस रोशन राज को जब कोरोना में बंदी के कारण घर वापस लौटना पड़ा तो उनके पास रोजगार का संकट खड़ा हो गया था. रोशन के लिए अपना और अपने परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया था. तब रोशन ने अपने साथियों के साथ मिल कर कुछ ऐसा किया कि वो आज एक उदहारण बन गए हैं. अपने मोपेड में सत्तू पीसने की मशीन सेट कर रोशन घूम-घूम कर सस्ते दर पर शुद्ध सत्तू बेच रहे हैं. और उनका ये रोजगार खूब फल-फूल रहा है.

बड़ी बात ये है कि शुद्ध और सस्ता सत्तू बेचने के कारण रोशन राज का काफी नाम हो रहा है. वह पहले घूम-घूमकर सत्तू बेचते थे और अब उनका बिजनेस इतना ज्यादा प्रचलित हो गया कि लोग ऑनलाइन भी उनकी सत्तू को आर्डर करने लगे हैं. आज की तारीख में रोशन खुद कस्टमर के दरवाजे तक शुद्ध और सस्ता सत्तू पहुंचा रहे हैं.

कोरोना में नौकरी गंवाकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने वाले रोशन बताते हैं कि लोग उन्हें ऑनलाइन सत्तू वाला के नाम से जानने लगे हैं. इस रोजगार ने न सिर्फ उनका और उनके परिवार का पेट भरा बल्कि इससे उन्हें समाज में एक अलग मिली. वह इस रोजगार से पहले से ज्यादा खुश हैं.

इधर, रोशन की सत्तू खरीदने वाले ग्राहक भी उचित दर पर शुद्ध और सस्ता सत्तू अपने घर के दरवाजे पर पाकर काफी संतुष्ट हैं. ग्राहकों के सामने चना पीसकर और सही नाप-तौल के साथ सत्तू बेचने के कारण रोशन के प्रति ग्राहकों का विश्वास भी काफी बढ़ा है.

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