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IPL का स्पॉन्सर बदला, चीनी कंपनी VIVO की जगह लेगी इंडिया की ये बड़ी कंपनी

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DESK : 2018 से वीवो आईपीएल को स्पॉन्सर कर रहा था. अब ये खबर आ रही है कि अब VIVO आईपीएल का हिस्सा नहीं होगा. आईपीएल के चेयरमैन बृजेश पटेल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को इसकी जानकारी दी है. मंगलवार को IPL गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में ये फैसला लिया गया.

VIVO का IPL टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए 2190 करोड़ रुपए के साथ 5 साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट हुआ था. कंपनी सालाना 440 करोड़ रुपए देती थी. यह कॉन्ट्रैक्ट 2018 से 2022 तक का था. पहले खबर थी कि वीवो का कॉन्ट्रेक्ट 2023 तक के लिए बढ़ाया जा सकता था, लेकिन अब टाटा ने उनकी जगह ले ली है.

चीनी कंपनी वीवो IPL की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए BCCI को हर साल 440 करोड़ रुपए देती है. पिछले साल भारत-चीन के बीच हुए विवाद के कारण जब देश में विरोध हुआ, तब एक साल के लिए वीवो को ब्रेक लेना पड़ा था. इससे पहले IPL 2020 के सीजन में फैंटेसी गेमिंग फर्म ड्रीम-11 टाइटल स्पॉन्सर रही थी.

इसके लिए ड्रीम-11 ने BCCI को 222 करोड़ रुपए दिए थे. यह कॉन्ट्रैक्ट 18 अगस्त से 31 दिसंबर 2020 तक के लिए था. यह राशि वीवो के सालाना भुगतान की करीब आधी थी. उनकी जगह टाटा ग्रुप को IPL का नया टाइटल स्पॉन्सर बनाया गया है. अगले साल यानी 2023 से टूर्नामेंट अब TATA IPLके नाम से जाना जाएगा.

बता दें, IPL के सेंट्रल स्पॉन्सरशिप में देसी कंपनियों का ही बोलबाला है. सेंट्रल और टाइटल स्पॉन्सरशिप दोनों के अधिकार अलग-अलग हैं. आईपीएल में सेंट्रल स्पॉन्सरशिप के तहत जर्सी के अधिकार नहीं आते हैं. यानी जर्सी पर छपे लोगो पर केवल टाइटल स्पॉन्सरशिप का ही अधिकार होता है.

साथ ही कंपनी को अपने ब्रांडिंग के लिए मैच के बाद का प्रजेंटेशन एरिया, डग आउट में बैकड्रॉप और बाउंड्री रोप जैसे बढ़िया स्पेस मिलते हैं. टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा पैसा देना होता है.

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