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Artificial Sun : देखिये इस नकली सूरज की ताकत, असली सूरज है इसके सामने फेल

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कहते हैं कि धरती पर जिंदगी जीने के लिए हवा, पानी और रोशनी की मौजूदगी बहुत जरूरी है। आज अगर मैं ये कहूं की इंसान ये सब खुद बना लेगा तो ये सुनने में कितना अजीब लगता है। ऐसा लगता है की ये सब तो नेचुरल चीज़ें हैं, इंसान इसे कैसे बना सकते हैं ? ये तो पॉसिबल ही नहीं है। हम सब जानते हैं कि पूरे सोलर सिस्टम को प्राकृतिक सूरज से रोशनी मिल रही है। लेकिन इन सबके बीच सवाल यह है कि प्राकृतिक सूरज कब तक अपनी चमक बिखेरेगा ? वैज्ञानिकों का दावा है की सूरज की उम्र सिर्फ 5 बिलियन साल ही बची है। ऐसे में कुछ साइंटिस्ट, आर्टिफीसियल सन बनाने में जुट गएँ हैं और कुछ ने तो इसे बना लेने का दावा भी किया है।

आपने सही सुना, हम इंसानों ने एक Artificial Sun बना लिया है। इस आर्टिफीसियल सन या कृत्रिम सूरज बनाने का दावा चीन ने किया है। आइये चलते हैं और जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

चीन ने वैज्ञानिकों ने हाल ही में आर्टिफीसियल सन बनाने का दावा किया है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन द्वारा तैयार किया गया यह सूरज, असली सूरज की तुलना में 10 गुना ज़्यादा ताकतवर है। 10 सेकेंड में Artificial Sun का तापमान 16 करोड़ डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया, जो की अपने आप में एक नया विश्व रिकॉर्ड है। इसका अर्थ यह है कि प्राकृतिक सूरज की तुलना में गर्मी, 10 गुना ज्यादा रही। खास बात यह है कि यह तापमान करीब 100 सेकेंड तक कायम भी रहा। आपको बता दे की चीन के अनहुई राज्य में एक रिएक्टर में इस नकली सूरज को बनाया गया है। चीन के इस आर्टिफीसियल सन का नाम EAST यानी की Experimental Advanced Superconducting Tokamak है।

सूरज हमारे जीवन का आधार है। अगर सूरज की रोशनी, एक दिन भी धरती को न मिले तो यह धरती कुछ ही घण्टों में विनाश की ओर चल पड़ेगी। आइये चलते हैं और जानते हैं इस आर्टिफीसियल सन EAST के बारे में।

EAST एक न्यूक्लियर रिएक्टर है। यह एडवांस्ड न्यूक्लियर फ्यूजन प्रक्रिया पर आधारित एक्सपेरिमेंटल रिसर्च डिवाइस है। इस रिएक्टर को अत्याधिक गर्मी और शक्ति के कारण कृत्रिम सूर्य का नाम दिया गया है। यह चीन के हेफ़ेई में Chinese Academy of Sciences के Plasma Physics संस्थान में स्थित है। इस रिएक्टर की एनर्जी प्रोडक्शन की प्रक्रिया, प्राकृतिक सूरज के एनर्जी प्रोडक्शन प्रक्रिया यानी की न्यूक्लियर फ्यूजन पर आधारित है। EAST रिएक्टर का ऑपरेशन, पहली बार 2006 में शुरू हुआ था।

सामान्य तौर पर न्यूक्लियर फ्यूजन की तकनीक के जरिए हाइड्रोजन बम बनाया जाता है। इसमें गर्म प्लाज्मा को फ्यूज करने के स्ट्रांग मैगनेटिक फील्ड का निर्माण किया जाता है, जिससे अत्यधिक गर्मी पैदा होती है।

आखिर क्या होता है फ्यूजन रिएक्शन, जिससे ये आर्टिफीसियल सन बना और जो रिएक्शन, प्राकृतिक सूरज में भी होती है।

न्यूक्लियर फ्यूजन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से बड़ी मात्रा में वेस्ट उत्पन्न किये बिना, हाई लेवल के एनर्जी का प्रोडक्शन किया जाता है। न्यूक्लियर फ्यूजन से ही सूरज को ऊर्जा मिलती है। इसकी वजह से ऐसा प्लाज्मा पैदा होता है जिसमें हाइड्रोजन के आइसोटोप्स यानि की ड्यूटीरियम और ट्राइटियम, आपस में फ्यूज होकर हीलियम और न्यूट्रॉन बनाते हैं। शुरुआत में रिएक्शन से गर्मी पैदा हो, इसके लिए एनर्जी की खपत होती है, लेकिन एक बार रिएक्शन शुरू हो जाता है तो फिर रिएक्शन की वजह से एनर्जी पैदा भी होने लगती है।

आपको बता दे की सिर्फ चीन ही नहीं है जो इस आर्टिफीसियल सन को बनाने में लगा हुआ है। फ्रांस में भी न्यूक्लियर फ्यूजन पर काम किया जा रहा है और ऐसा अनुमान है की यह प्रोजेक्ट 2025 में पूरी हो जाएगा। इसके अलावा कोरिया ने भी आर्टिफीसियल सन बनाने में सफलता हासिल की है। मनुष्य चाँद तक तो पहुंच ही चूका है, और अब ऐसा लग रहा है की सूरज भी दूर नहीं है।