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18 साल बाद मिली कल्पना चावला

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अंतरिक्ष में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट की वो यात्रा, किसी की यह बात सच कर रही थी की वो अंतरिक्ष के लिए ही बनी हैं। वो बचपन में सितारों के बीच उड़ने का सपना देखना, आंखों में एक अलग चमक और एक अलग जज़्बा होना किसी को उसके अंतरिक्ष में जाने के ख्वाब को पूरा कर रहा था। मैं बात कर रही हूँ स्पेस में जाने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की। कल्पना, जब अपने दूसरे स्पेस शटल मिशन के लिए रवाना हो रही थीं तो ये किसी को नहीं पता था की अब वो कभी वापस नहीं आने वाली हैं। कल्पना की मौत ने पूरे अंतरिक्ष जगत में भारत की उड़ान को धीरे कर दिया था। लेकिन अब 18 साल बाद भारत को एक और कल्पना चावला मिल गयी हैं। दरअसल, भारतीय मूल की बेटी सिरिशा बांदला, अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारत में जन्मी दूसरी महिला बनने वाली हैं।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री की बात करे तो सबसे पहले जुबान पर भारतवंशी कल्पना चावला का ही नाम आता है। लेकिन अब एक और भारतीय मूल की बेटी सिरिशा बांदला, इस महीने के अंत में अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली हैं। बांदला, स्पेस कंपनी Virgin Galactic के मालिक Richard Branson सहित, छह अंतरिक्ष यात्रियों में से एक होंगी। अंतरिक्ष यात्री नंबर 4 के रूप में, बांदला की भूमिका एक रिसर्चर एक्सपीरियंस की होगी। वह वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशंस की वाइस प्रेसीडेंट हैं।

भारत की ओर से अंतरिक्ष में सबसे पहले कदम रखने वाले, राकेश शर्मा थे। इसके बाद कल्‍पना चावला गई थीं। वहीं भारतीय मूल की सुनीता विलियम्‍स ने भी अंतरिक्ष में कदम रखा था।

बांदला, स्पेस कंपनी Virgin Galactic के अंतरिक्ष यान वर्जिन ऑर्बिट (Virgin Orbit) में बैठकर 11 जुलाई को अंतरिक्ष की सैर पर जाएंगी। यह अंतरिक्ष यान न्यू मेक्सिको से उड़ान भरेगा जिसमें क्रू के सभी सदस्य कंपनी के कर्मचारी होंगे। सिरिशा के साथ बेथ मोसेस, इस यात्रा पर क्रू की दो महिला सदस्य होंगी। वर्जिन गैलेक्टिक के लिए यह अंतरिक्ष तक जाने वाली चौथी उड़ान होगी। इस यात्रा की ख़ुशी को जाहिर करते हुए सिरिशा बांदला ने ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं Unity 22 के अद्भुत दल का हिस्सा बनने और एक ऐसी कंपनी का हिस्सा बनने के लिए अविश्वसनीय रूप से सम्मानित महसूस कर रही हूं जिसका मिशन सभी के लिए स्पेस को उपलब्ध कराना है।”

आपको बता दे की सिरिशा बांदला आंध्र प्रदेश के गुंटूर की रहने वाली हैं। वह भारतीय मूल की दूसरी ऐसी महिला होंगी जो अंतरिक्ष के सफर पर जा रही हैं।

सिरिशा टेक्सास के ह्यूसटन में पली बढ़ी हैं। वह Purdue University से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं और Georgetown University से एमबीए की डिग्री भी रखती हैं। वर्जिन गेलेक्टिक में काम करने से पहले, उन्होंने टेक्सास में एक एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में काम किया, जिसके बाद उन्हें Commercial Spaceflight Federation में स्पेस पॉलिसी में नौकरी मिली।

अपने सपनो के उड़ान के जरिये अपनी पहचान बनाने वाली सिरिशा बांदला की अंतरिक्ष में ये कदम, भारत को एक सुनहरे भविष्य की ओर ले जाने का कदम होगा।