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‘Happy Birthday Lata Mangeshkar’ : जिनके गले में बस्ती है सरस्वती

Lata Mangeshkar
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स्वर की मल्लिका जिनके गले में सरस्वती का बास कहा जाता है। स्वर कोकिला और भारत रत्न जैसे सम्मान से सम्मानित लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का आज अपना 92वां जन्मदिन मन रही हैं। 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में जन्मी लता मंगेशकर देश के लिए किसी रत्न से कम नहीं है। लता मंगेशकर के पिता का नाम पंडित दीनदयाल मंगेशकर था। लता के पिता रंगमंच के कलाकार होने के साथ साथ गायक भी थे। इसलिए उन्हें संगीत विरासत में मिली है। पिछले कई दशकों से भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज दे रहीं लता मंगेशकर अपने जीवन में बेहद ही शांत स्‍वभाव और प्रतिभा से भरी हैं। इनके जन्मदिन के मौके पर आज देश के प्रधानमंत्री सहित देशभर से लता मंगेशकर को जन्मदिन की बधाईयां दी जा रही है। तो आइये जानते हैं इनके जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन से जुडी कुछ रोचक बातों को :

  • लता मंगेशकर हिंदी भाषा में 1,000 से ज्यादा गीतों को अपनी आवाज दी है।
  • उन्हें साल 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
  • साल 2001 में लता मंगेशकर भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ भी दिया गया था।
  • लता ने लगभग 20-25 से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं।
  • लता के भाई बहनों में हृदयनाथ मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोंसले है।
  • पहली बार लता ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म किती हसाल के लिये गाना गाया है।
  • पिता की मृत्यु के बाद घर को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा था।
  • पैसों के लिये उन्हें कुछ हिन्दी और मराठी फ़िल्मों में काम करना पड़ा था।
  • अभिनेत्री के रूप में लता की पहली फ़िल्म पाहिली मंगलागौर (1942) रही, जिसमें उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी।
  • उन्होंने खुद की भूमिका के लिये गाने भी गाये और बहन आशा के लिये पार्श्वगायन किया।
  • लता मंगेशकर अब तक कई भाषाओं में 30000 से अधिक गाने गा चुकी हैं।
  • लता मंगेशकर ने 1980 के बाद से फ़िल्मो में गाना कम कर दिया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान देने लगी।
  • लता ही एकमात्र ऐसी जीवित व्यक्ति हैं जिनके नाम से पुरस्कार दिए जाते हैं।
  • लता हमेशा नंगे पाँव गाना गाती हैं।
  • साल 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड भी बनाया है।
  • 2001 में उन्हें नूरजहाँ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

इसके साथ ही उन्हें देश विदेश के कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।