चर्चित व्यक्ति

Happy Birthday Lalu Prasad Yadav : गरीब अहीर परिवार से लेकर बिहार की बड़ी राजनीतिक पार्टी तक का सफर

lalu-yadav
Spread It

बिहार की राजनीतिक गलियारों में एक ऐसे राजनेता जिनका नाम हर दिन गुंजता है। और वह नाम है ‘लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav)। बिहार की सियासत से जुड़ा एक ऐसा चेहरा जिसे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जानती है। इनकी राजनीति के फैन देश के युवा सहित राजनेता भी हैं और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी खुद को इनका फैन बनने से नहीं रोक पाए। ‘लालू प्रसाद यादव का नाम बिहार (BIhar) के विधानसभा से लेकर दिल्ली के राज्यसभा तक फैला हुआ है। जब लालू प्रसाद यादव बिहार के राजनीति में सक्रिय हुए थे उस समय एक कहावत बहुत प्रचलित हुई थी ‘जब तब तक रहेगा समोसे में आलू तब तक रहेगा बिहार में लालू’।

पटना यूनिवर्सिटी (Patna University) स्टूडेंट यूनियन की राजनीति से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री से देश के रेल मंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव एक ऐसे नेता है जिसने लगभग हर पार्टी के खिलाफ इलेक्शन लड़ा है। देश का यह नेता आज 74 साल के हो गए हैं। 1990 की राजनीति से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री से होते हुए देश के रेल मंत्री के रास्ते चारा घोटाला में रांची के जेल तक के सफर के बारे में आज जानेंगे:

लालू का बचपन काफी गरीबी में बीता। उनकी किताब ‘गोपालगंज से रायसीना’ में उन्होंने अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहा है कि उनके पास शरीर ढ़कने के लिए पूरे कपड़े भी नहीं थे।

लालू के बड़े भाई की नौकरी पटना वेटनरी कॉलेज में एक चपरासी की लगी, तब जाकर परिवार की हालत थोड़ी सुधरी। बचपन से तेज दिमाग के लालू को उनके भाई ने पढ़ने के लिए अपने पास पटना बुला लिया। और उनका एडमिशन शेखपुरा मोर के मिडिल स्कूल में करव दिया। फिर पटना के ही मिलन स्कूल से लालू ने अपने दसवीं की परीक्षा पास की।

पढ़ाई में अच्छे होने के कारण उन्हें स्कूल के Poor Boy Fund से पढ़ाई के लिए पैसे मिलने लगे थे। पटना यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस से लालू ने ग्रेजुएशन किया और उसी समय से यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन की राजनीति में सक्रिय हुए थे।

लालू ने 1970 में पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव के रूप में छात्र राजनीति में कदम रखा और 1973 में अध्यक्ष बने। बाद में लालू प्रसाद ने Law में एडमिशन लिया इस बीच उनकी शादी राबड़ी देवी से तय की गई।

1974 में, उन्होंने बिहार में जयप्रकाश नारायण की अगुवाई वाली छात्र आंदोलन में बढ़ोतरी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ हो रहे आंदोलन में शामिल हो गए। इसी बीच लालू पटना के कदम कुआं से गिरफ्तार किए गए जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनका नाम खूब उछलने लगा।

सन 1977 के लोकसभा चुनाव में लालू छपरा से सांसद पद पर चुनाव लड़े थे और उस समय 29 साल के लालू लोकसभा के सबसे युवा सांसदो में से एक थे।

फिर एक समय ऐसा आया जब भ्रष्टाचार के आरोप में लालू प्रसाद को जेल जाना पड़ा और उस वक्त उन्होंने बिहार की गद्दी अपनी धर्मपत्नी राबड़ी देवी के हाथों में सौंप दी। और जेल में रहकर है वह अपनी पत्नी द्वारा बिहार की बागडोर संभाले हुए थे।

जब लालू के ऊपर चारा घोटाले का आरोप लगा तो जनता दल पार्टी के लोग दो हिस्सों में बट गये। जुलाई 1997 को लालू ने अपनी खुद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की।

1997 में बनी इस पार्टी ने बिहार में 2005 तक अपना वर्चस्व कायम रखा। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में दूसरे सबसे बड़े पार्टी के तौर पर असल में अपनी हिस्सेदारी निभाई।

रेल मंत्री के तौर पर उन्होंने भारतीय रेल में अपनी योगदान देते हुए कई रेल साड़ियों का शुभारंभ किया था। और घाटे में चल रहे भारतीय रेल को मुनाफा का सौदा बताया था।

2015 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ देशभर में महागठबंधन की सरकार बन रही थी उसी बीच बिहार में भी महागठबंधन की सरकार बनी। जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी से अपने दोनों बेटों को इलेक्शन में खड़ा कर बिहार मंत्रिमंडल में शामिल करवाया। यह तो सबको पता है कि उनकी बेटी मिशा भारती भी उनकी पार्टी से राज्यसभा सांसद हैं।

चारा घोटाले में जेल जाने से लेकर अभी अपनी बेटी के साथ रहने तक उन पर कई आरोप लगते रहे लेकिन उन्होंने कभी किसी आरोप को खुद पर हावी नहीं होने दिया और सभी आरोपों का डटकर सामना किया।

1997 में जब central bureau of investigation ने उनके खिलाफ चारा घोटाले वाले मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया तो लालू प्रसाद को अपने मुख्यमंत्री पद को छोड़ना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को बिहार की डोर संभालने को दी।

तकरीबन 17 तक चले इस मुकदमे में CBI की स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने लालू प्रसाद यादव को वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के जरिये 3 अक्टूबर 2013 को 5 साल की कैद व 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री रहे, देश के रेल मंत्री रहे और उसके बाद चारा घोटाले में 5 साल की सजा भी मिली इन सब के बावजूद भी आज भी बिहार मंत्रिमंडल में उनकी पार्टी राजद सबसे बड़ी पार्टियों में से एक है।