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George Fernandes : मजदूरों की आवाज और देश के अनथक विद्रोही

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देश के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस (George Fernandes) का 88 साल की उम्र में निधन हो गया था। वे अपने जीवन काल में 9 लोकसभा चुनाव जीते थे। इस दौरान उन्होंने कई बड़े मंत्रालयों का भार संभाले को मिला था। जॉर्ज देश में ‘अनथक विद्रोही’ के नाम से मशहूर थें, क्योंकि उन्होंने देश में कई बड़ी हड़ताल और विरोध का नेतृत्व किया था। जिसमें 1974 में की गई देशव्यापी रेल हड़ताल अहम है।

आज यानी 3 जून को उनका 91वां जयंती मनाया जा रहा है। सदैव मजदूरों के हित में काम करने वाले जॉर्ज फर्नांडिस के 91 जयंती पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं:

जॉर्ज फर्नांडीस (George Fernandes) का जन्‍म 3 जून 1930 को मैंगलोर के मैंग्‍लोरिन-कैथोलिक परिवार में हुआ था। वे अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।

इन्‍होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मैंगलौर के स्‍कूल से पूरी की। इसके बाद मैंगलौर के सेंट अल्‍योसिस कॉलेज से अपनी 12वीं कक्षा पूरी की।

1950 में वे राममनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohiya) के करीब आए और उनके जीवन से काफी प्रभावित हुए। उसके बाद वे सोशलिस्‍ट ट्रेड यूनियन के आन्दोलन में शामिल हो गए।

साल 1961 तथा 1968 में मुम्बई सिविक का चुनाव जीतकर वे मुम्बई महानगरपालिका के सदस्‍य बन गए। इसके साथ ही वे लगातार निचले स्‍तर के मजदूरों एवं कर्मचारियों के लिए आवाज उठाते रहे और राज्‍य में सही तरीकों से कार्य करते रहे।

साल 1967 के लोकसभा चुनाव में उन्‍हें संयुक्‍त सोशियल पार्टी की ओर से मुंबई साउथ की सीट से कांग्रेस के सदाशिव कानोजी पाटिल के खिलाफ टिकट दिया गया था। और उन्होंने सदाशिव पाटिल (Sadashiv Patil) को भारी मार्जिन से हराया था।

1969 में वे संयुक्‍त सोशियल पार्टी के जनरल सेक्रेटरी चुन लिए गए और 1973 में पार्टी के चेयरमैन बने।

1974 में जॉर्ज ने ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन का अध्‍यक्ष बनने के बाद भारतीय रेलवे के खिलाफ हड़ताल शुरू की।

1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी और उसका विरोध करने वालों को जेल में भर दिया। जॉर्ज फर्नांडीस ने भी दूसरों की तरह इसका विरोध किया तो इनके खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया जिससे बचने के लिए वे हमेशा अपनी वेशभूषा बदलते रहते थे।

10 जून 1976 को जॉर्ज कलकत्ता से गिरफ्तार कर लिए गए। इनके गिरफ्तार होने के बाद एमनेस्‍टी इंटरनेशनल मेंबर ने सरकार से अनुरोध किया कि इन्‍हें तुरंत एक वकील दिया जाए और इनकी जान की गारंटी भी ली जाए।

जॉर्ज कई भाषाओं के जानकार थे, यही कारण है कि उन्हें देश के अलग-अलग भागों में जाकर भाषण देने के दौरान भाषाई परेशानी भी नहीं होती थी।

उन्होंने जेल में रहते हुए ही बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ा और उसमें जीत भी हासिल की। उसके बाद वो कई बार मंत्री बने और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे रक्षा मंत्री थे।

राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रह चुके जॉर्ज केंद्रीय मंत्रिमंडल में रक्षामंत्री, संचारमंत्री, उद्योगमंत्री, रेलमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। साथ ही जॉर्ज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के संयोजक भी रहे थे।