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‘Emergency Response Support System’ – अब बिहार के जनता को सारे इमरजेंसी नंबर याद रखने की जरूरत नहीं

BIHAR-POLICE
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देश का निर्भया कांड कोई चाह कर भी अपने जेहन से नहीं मिटा सकता। 16 दिसंबर को 2012 की वो काली रात जब दिल्ली में कुछ दरिंदों ने एक लड़की की आबरू तो लूटी ही साथ ही उन हैवानों ने हैवानियत की हर हद्दें पार कर दी थी। और फिर निर्भया ने 29 दिसम्बर को आखिरी सांस ली, जिसके बाद शुरू हुई उन हैवानों को उनके किये की सजा दिलाने की जद्दो-जहद। उस वक़्त दिल्ली पुलिस ने हैवानों को सलाखों के पीछे पहुंचाए बिना अपनी आँखे तक नहीं छप्काइ थी। दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद गठित Justice J. S. Verma कमिटी की सिफारिशों के आधार पर ERSS यानी Emergency Response Support System प्रणाली बनाई गयी। जिसे अब तक देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू कर दिया गया है। और अब यहीं Emergency Response Support System बिहार में लागु होने वाला है

राजधानी पटना में दिसंबर तक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम/ERSS काम करने लगेगा। बिहार की राजधानी पटना में ही इसका पहला ट्रायल किया जायेगा। और राजधानी में ही इसका कमांड सेंटर भी बनाया जायेगा। इसके तहत अब बिहार वासियों को 100 की जगह 112 नंबर पर डायल करना पड़ेगा। जिसके बाद पुलिस फौरन मौके पर पहुंचेगी। इसके साथ ही इसमें एक ऐसा फीचर दिया गया है कि जिसे आप सुन कर शॉक हो जायेंगे। ERSS प्रणाली में आपसे पुलिस का फीडबैक लिया जायेगा कि पुलिस समय पर पहुंची कि नहीं। नई व्यवस्था में पुलिस का अधिकतम रिस्पॉन्स टाइम 10-15 मिनट का होगा।

लेकिन इससे पहले अगर आपको ERSS प्रणाली के बारे में पता नहीं है तो आपको इस सिस्टम के बारे में जानना बेहद जरूरी है। यह इसलिए क्योंकि लोगों की सुरक्षा का सवाल है और साथ ही यह अब आपके राज्य में लागू होने वाला है। जैसा की मैंने आपको बताया कि इस प्रणाली की शुरुआत साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया मामले से जुड़ा है। और इसी घटना के बाद ही ERSS सिस्टम शुरू करने का फैसला लिया गया था। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर बताया गया है कि ‘ERSS दिसंबर 2012 में हुई निर्भया की दुखद घटना के संदर्भ में Justice J. S. Verma कमेटी की कई सिफारिशों में से एक है। और इसीलिए इसका Dial No. भी ‘112’ है।

दरअसल, Emergency Response Support System एक केंद्रीय योजना है। देश में सबसे पहले इसे हिमाचल प्रदेश में लागू किया गया था। इसके बाद इसे देश के अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी लागु किया गया। इस सेवा का मूल मकसद सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक धागे में पिरोना है। जिससे लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। आम जनता को सारे इमरजेंसी नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी वो सिर्फ 112 पर Dial कर के सेवा उठा सकते हैं। और इस सिस्टम का काम ये है कि लोगों तक मदद की हाथ जल्द से जल्द पहुंचे। इसके लिए ‘112 India’ ऐप भी लॉन्च किया गया है। इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड कर आप रजिस्टर कर सकते हैं। इसके जरिए भी आप किसी तरह की आपातकालीन परिस्थिति में मदद ले सकते हैं।

फिलहाल देश में पुलिस के लिए 100, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 108, Fire Fighting सेवाओं के लिए 101, महिला हेल्पलाइन के लिए 1091 और 181, चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए 1098 नंबर हैं। लेकिन अब बिहार में ERSS के लागु होने के बाद इन सभी को 112 के अंतर्गत लाया जायेगा। यानी खुदा ना खस्ता कोई आपात की स्थिति उत्पन्न होती है तो अब आपको फ़ोन के Contacts में जा कर no. खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस 112 याद रखना है और कुछ हीं मिनटों में मदद की हाथ आप तक पहुँच जाएगी।

अब बात करते हैं बिहार में लागु होने वाले इस सपोर्ट सिस्टम के बारे में। राजधानी पटना के राजवंशी नगर के पास वायरलेस कैंपस में इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम सेंटर का निर्माण चल रहा है। कहीं से भी लोग अगर 112 पर कॉल करेंगे तो इसी सेंटर में सबसे पहले रिसीव किया जाएगा। उसके बाद यहां बड़ी संख्या में तैनात किए गए कर्मी जरूरत के हिसाब से उसे संबंधित विभाग को ट्रांसफर कर देंगे। इस तरह यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।

पहले चरण में पटना के साथ साथ दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गया, नालंदा, वैशाली, मुंगेर, पूर्णिया, भागलपुर समेत 10 जिलों में डायल 112 काम करेगा। उसके बाद अन्य 28 जिलों में भी इसकी कनेक्टिविटी होगी। फिलहाल अभी डायल 100 काम कर रहा है। आने वाले दिनों में डायल 112 की मॉनिटरिंग के लिए DSP स्तर के एक-दो अधिकारी तैनात किए जाएंगे।

मुख्य बात यह है कि Dial 112 के पास अपनी खुद की फोर्स होगी, वह Dial 100 की तरह ही थानों को सूचना फॉरवर्ड करने तक सीमित नहीं होगा। पुलिस के अलावा 112 फायर, एक्सीडेंट समेत किसी भी इमरजेंसी में इसपर कॉल करना होगा।

इसके तहत पटना को 60 अलग-अलग एरिया में बांटा जाएगा और हर एक में पुलिस फोर्स वाली एक Emergency Response Vehicle तैनात रहेगी। हर एक ERV को एक किलोमीटर की परिधि में मूव करना होगा और इमरजेंसी में फंसे लोगों तक पहुंचना होगा। इस सिस्टम की पूरी तरह से सफल लांचिंग के बाद डायल 100 को खत्म कर दिया जाएगा। हाल ही में इसके लिए ERSS के तकनीकी अधिकारियों के साथ पटना के सभी शहरी क्षेत्रों के थानेदारों को ट्रेनिंग भी दी गई थी।

सभी 60 वाहनों पर रोजाना 3 शिफ्टों में 900 अफसर व जवान गश्त लगायेंगे। कुल 100 अफसर और जवानों को अतिरिक्त रखा जाएगा, जो replacement होंगे। ERV रेडियो सेट और GPS से लैस रहेगा, कॉलर का लोकेशन भी ट्रैक होगा। 90 फोन लाइन, 3 शिफ्ट में 270 महिलाएं काम करेंगी, 30 अलग replacement होंगी।

अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इसी साल के अक्टूबर से दिसम्बर के बीच यह नई सेवा राज्य में शुरू हो जाएगी। गृह विभाग ने इस योजना पर काम करना शुरू भी कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम के लिए 176.22 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें 10.80 करोड़ रुपए केंद्रीय अनुदान के रूप में प्राप्त होगा। जबकि राज्य सरकार को 165.42 करोड़ की राशि खर्च करनी है। इसी के तहत गृह विभाग ने पहले चरण में 48 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। जिससे इमरजेंसी सेवा के लिए जरूरी 4 wheeler वाहनों की खरीद की जाएगी।

ऐसे तो इस Emergency Response Support System को तो राज्य भर में लागू करना है, लेकिन पहले चरण में राजधानी पटना समेत 10 जिलों से इसकी शुरुआत की जाएगी। और फिर धीरे-धीरे बाकि के 28 जिलों में इसकी कड़ियों को जोड़ा जायेगा। इस सिस्टम के लागु होने से बिहार में सुशासन की भी बढ़ोतरी होगी।