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World Press Freedom Day : अहम है प्रेस की स्वतंत्रता और इसका दिवस

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प्रेस, मीडिया, जर्नलिस्ट, रिपोर्टर, फ्रीलांसर और ना जाने क्या क्या… लेकिन इन सब का मतलब एक ही है। वो जो जनता के सवालों को सरकार के सामने रखें और सरकार द्वारा जनता के हित में किया गया काम को अपने कलम की ताकत से जनता के सामने लाए। यानी सरकार और जनता के बीच की कड़ी। लोकतंत्र में इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।

दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता पर सैकड़ों लोगों ने अपनी राय दी है। लेकिन दुनिया भर में जब जब कोई लड़ाई छिड़ी है उसमें प्रेस अपनी कलम की तलवार से एक अलग लड़ाई लड़ा है। चाहे वह द्वितीय विश्व युद्ध के समय की बात हो या फिर भारत में हो रहे स्वतंत्रता संग्राम की। एक तरफ जहां सुखदेव भगत सिंह राजगुरु गांधी और भी ना जाने कितने लोग अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी के लिए अपनी लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रेस अपने कलम की तलवार से अंग्रेजो के खिलाफ देश की आजादी के लिए अपनी लड़ाई लड़ रहे थे। और यह प्रेस ही था जो देश के हर व्यक्ति के अंदर अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश पैदा करने का काम किया था।

आइए जानते हैं इस दिन के बारे में –

दुनियाभर में हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस (World Press Freedom Day) मनाया जाता है। साल 1997 से यूनेस्को द्वारा हर साल 3 मई को विश्व प्रेस दिवस मनाया जाता है।

इस दिन ये बताया जाता है कि मीडिया का समाज में कितना अहम रोल है।

लोकतंत्र को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए भी वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे सेलिब्रेट किया जाता है।

इस मौके पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार (Guillermo Cano World Press Freedom Prize) दिया जाता है। यह पुरस्कार उस संस्थान या व्यक्ति को दिया जाता है जिसने प्रेस के आजादी के लिए उल्लेखनीय कार्य किये हो।

हर साल विश्व प्रेस दिवस का थीम रखा जाता है और इस साल का थीम है “लोगों के भले के लिए सूचना” (Information as Public Good)।

भारत के किसी भी पत्रकार या संस्थान को अभी तक यह पुरस्कार नहीं दिया गया है।

इसे मनाने के पीछे यूनिस्को का मकसद सरकारों को याद दिलाना है कि प्रेस की आजादी के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान करने की जरूरत है।

यूनेस्को इस बार इसमें तीन बिंदुओं पर काम करेगा– 1.मीडिया के आर्थिक व्यवहारिकता को सुनिश्चित करना, 2.इंटरनेट कंपनियों के पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए प्रणाली बनाना, 3.मीडिया और जानकारी साक्षरता क्षमताओं को बढ़ाना जो लोगों में मूल्यों की पहचान क्षमता बढ़ाती हैं।

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के गैर लाभकारी संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (International Journalism Not-For Profit Body, Reports Without Boarders, RSF) की ओर से जारी विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग पिछले साल की तरह 142 ही है।