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World Photography Day : यादों को संजोकर रखने का एक पिटारा

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रूखी होठो पे हंसी, झुकी पलकों पे खुशी
स्याह रातें चमकाता हूं, आस को खास भी बनाता हूँ।
इस भागते दुनिया को दो पल रोकने का हुनर रखता हूँ
मैं फोटोग्राफर हूँ जनाब, यादों को सजाने का अदब रखता हूँ।

कहते हैं की हर एक तस्वीर एक कहानी कहती है। हमारे यादों को संजोकर रखने के लिए, एक तस्वीर काफी अहम भूमिका निभाती है। ये काफी खास होती है।


इसी तस्वीर की अहमियत को ध्यान में रखते हुए हर साल 19 अगस्त को World Photography Day यानी की “विश्व फोटोग्राफी दिवस” मनाया जाता है।


यह दिन उन लोगों को समर्पित होता है, जो अपने कैमरे के माध्यम से ऐतिहासिक क्षणों को रिकॉर्ड कर उस मोमेंट को खास बना देते है।


विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुरुआत फ्रांस से हुई थी। फ्रांस के जोसेफ नाइसफोर नीपसे (Joseph Nicephore Niepce) और लुइस डॉगेर (Louis Daguerre) ने 9 जनवरी, 1839 को फोटोग्राफी की एक तकनीक डॉगोरोटाइप प्रक्रिया को विकसित किया था।


फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज ने आधिकारिक तौर पर 19 जनवरी, 1839 को डैगुएरियोटाइप के आविष्कार की घोषणा की थी और इसी दिन की याद में ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ मनाया जाता है।


अमेरिका के फोटो प्रेमी रॉबर्ट कॉर्नेलियस (Robert Cornelius) को दुनिया की पहली सेल्फी क्लिक करने वाला माना जाता है। उन्होंने 1839 में यह तस्वीर खींची थी।


इस दिन का उद्येश्य दुनिया भर के फोटोग्राफर्स को ऐसी तस्वीर खींचने के लिए प्रोत्साहित करना है जिसमें पूरे विश्व की स्पष्ट और साझा झलक हो।


वैज्ञानिक तथा तकनीकी सफलता के साथ-साथ फोटोग्राफी ने भी आज बहुत तरक्की की है। आज व्यक्ति के पास ऐसे-ऐसे साधन मौजूद हैं जिसमें सिर्फ बटन दबाने की देर है और मिनटों में अच्छी से अच्छी तस्वीर उसके हाथों में होती है।


तकनीक चाहे जैसी तरक्की करे, उसके पीछे कहीं न कहीं दिमाग ही काम करता है। फोटोग्राफी में भी अच्छा दिमाग ही अच्छी तस्वीर प्राप्त करने के लिए जरूरी है।


फोटोग्राफी, कला का एक रूप है जो पल को हमेशा के लिए अमर कर देता है। यह डिजिटल युग में संचार के सबसे महत्वपूर्ण रूप से उपयोग किए जाने वाले साधनों में से एक बन गया है।

यह एक सालाना वैश्विक उत्सव है जिसमें फोटोग्राफी के इतिहास, इसकी कला, शिल्प और विज्ञान का प्रदर्शन किया जाता है।