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Mangal Pandey : महानायक जिससे कांपती थी अंग्रेजी सरकार

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भारत की आजादी के लिए पहले आंदोलन का श्रेय अमर शहीद मंगल पांडे (Mangal Pandey) को जाता है। साल 1857 की क्रांति के नायक से अंग्रेज इतने खौफजदा हो गए थे कि फांसी के लिए तय की गयी तारीख से 10 दिन पहले ही उन्हें चुपके से फंदे से लटका दिया था। अंग्रजों को इतना डर सता रहा था कि वो अगर जल्द से जल्द मंगल पांडे को फांसी नहीं चढ़ाये तो उनकी जलाई गयी चिंगारी पूरे भारत में विद्रोह की अंगार को भड़का सकती थी। इसीलिए 8 अप्रैल 1857 को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में आज़ादी के नायक को फांसी दे दी गई थी।

➮ उनका जन्म भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 30 जनवरी 1831 को हुआ था। उनके पिता का नाम दिवाकर पांडे (divakar pandey) था। वह 18 साल की उम्र में (1849) ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए।

➮ 1850 के दशक के उत्तरार्ध में सिपाहियों के लिए नई इनफील्ड राइफल लाई गई थी। उस कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी मिली होती थी। जिन्हें मुंह से काटकर राइफल में लोड करना होता था। यह बात हिंदुओं और मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ थी। आखिरकार मंगल पांडे ने 29 मार्च 1957 को विद्रोह कर दिया।

➮ उन्होंने कारतूस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया और साथी सिपाहियों को भी विद्रोह के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ‘मारो फिरंगी को’ नारा दिया। उसी दिन मंगल पांडे ने दो अंग्रेज अफसरों पर हमला किया था। इसके बाद उनपर मुकदमा चलाया गया और उन्होंने अंग्रेज अफसरों के खिलाफ विद्रोह की बात स्वीकार की थी। फिर उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और तारीख 18 अप्रैल तय की गयी।

➮ फिरंगियों को डर था कि मंगल पांडे ने जो विद्रोह की चिंगारी जलाई है वह देशभर में अंगार न बन जाए। इसी डर के कारण फिरंगियों ने तय समय से 10 दिन पहले हीं मंगल पांडे को फांसी दे दी। उनकी फांसी के बाद मेरठ, कसौली, कांगड़ा, धर्मशाली समेत देशभर में कई जगहों पर सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया और उनके मरने के बावजूद भी आम लोगों में अंग्रेजों के प्रति आक्रोश का अंगार बढ़ने लगा था।

➮ इसके बाद हिमाचल प्रदेश के कसौली में सिपाहियों में, मेरठ के भारतीय घुड़सवार सैनिकों में, साथ हीं मेरठ के भारतीय सैनिकों ने पश्चिमी- उत्तर प्रदेश के साथ देशभर विद्रोह की आग फैलनी लगी थी।

➮ मंगल पांडे के सम्मान में 1984 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया था। 2005 में उनके जीवन पर ‘मंगल पांडे- द राइजिंग’ नाम की फिल्म भी बनी थी।

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