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Raja Ravi Varma Birth Anniversary : वह चित्रकार जिन्होंने भगवान को इंसान का रूप दिया

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पांच साल की उम्र से ही कलाकारी दिखाने वाले ‘राजा रवि वर्मा’ (Raja Ravi Varma) भारत के विख्यात चित्रकार हैं।

वह भारत के इतिहास में सबसे महान चित्रकार हैं और ‘Father of Modern Indian Art’ के रूप में जाने जाते हैं।

राजा रवि वर्मा का जन्म 29 April 1848 को केरल के एक छोटे से शहर किलिमानूर में हुआ था।

पाँच वर्ष की छोटी सी आयु में ही उन्होंने अपने घर की दीवारों को दैनिक जीवन की घटनाओं से चित्रित करना प्रारम्भ कर दिया था।

उनके चाचा राज राजा वर्मा, जो की एक कलाकार थे ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कला की प्रारम्भिक शिक्षा दी।

14 वर्ष की आयु तक, वर्मा को त्रावणकोर के तत्कालीन शासक Ayilyam Thirunal द्वारा संरक्षण दिया गया था और उन्होंने सिटी पैलेस में वाटर कलर पेंटिंग सीखी थी। बाद में, उन्हें ब्रिटिश कलाकार Theodor Jenson द्वारा ऑयल पेंटिंग में प्रशिक्षित किया गया था।

18 वर्ष की आयु में, वर्मा ने मवेलिक्कारा के शाही घर की 12 वर्षीय Bhageerthi Bai से शादी की। इस दंपति के दो बेटें और तीन बेटियाँ थी।

उनके चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता हिंदू महाकाव्यों और धर्मग्रन्थों पर बनाए गए चित्र हैं। हिन्दू मिथकों का बहुत ही प्रभावशाली इस्‍तेमाल उनके चित्रों में दिखता हैं।

राजा रवि वर्मा ही वो पहले चित्रकार थे, जिन्होंने देवी-देवताओं को आम इंसान जैसा दिखाया।

उन्होंने 1894 में एक लिथोग्राफिक प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत की और मुख्य रूप से देवी-देवताओं, और महाभारत, रामायण और पुराणों के दृश्यों का चित्रण करते हुए ऑलियोग्राफ़्स का निर्माण किया।

वर्मा पहले भारतीय कलाकार थे जिन्होंने वाटर कलर के बजाय ऑइल पेंट का इस्तेमाल किया था। ऑइल पेंटिंग रवि वर्मा की पहली पसंद थी, जिसमें वे महारथ थे।

वर्मा एक शाही चित्रकार बन गए थे। उनकी लोकप्रियता इस हद तक बढ़ गई कि उन्हें डाकघर खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा और देश के विभिन्न कोनों से उनके लिए चित्रों और अनुरोधों की बाढ़ आ गई थी।

1873 में, वर्मा ने Vienna Art Exhibition में पहला पुरस्कार जीता। यह पेंटिंग ‘मुल्लप्पू चूटिया नायर स्त्री’ (चमेली के फूलों से केशालंकार करती नायर स्त्री) की थी।

1904 में, ब्रिटिश सम्राट की ओर से, Viceroy Lord Curzon ने रवि वर्मा को ‘केसर-ए-हिंद’ से नवाजा।

राजा रवि वर्मा को वड़ोदरा के महाराजा द्वारा विशेष रूप से शाही परिवार के चित्रों और पौराणिक कथाओं पर आधारित चित्र बनाने के लिए कमीशन दिया गया था। इनका एक बड़ा संग्रह अभी भी वड़ोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में प्रदर्शित है।

2013 में, उनके सम्मान में बुध पर एक गड्ढा को ‘वर्मा’ नाम दिया गया था।

वे पहले भारतीय चित्रकार थे, जिनका काम आम जनता को उपलब्ध कराया गया था और वह शाही वर्ग तक सीमित नहीं था।

राजा रवि वर्मा की पेंटिंग भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉमिक बुक सीरीज, ‘अमर चित्र कथा’ कॉमिक्स की प्रेरणा थी।

ऐसा माना जाता है कि 58 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु से पहले लगभग 7,000 चित्रों का निर्माण किया गया था।

अक्टूबर 2007 में उनके द्वारा बनाई गई एक ऐतिहासिक कलाकृति, जो भारत में ब्रिटिश राज के दौरान ब्रिटिश राज के एक उच्च अधिकारी और महाराजा की मुलाक़ात को चित्रित करती है, 1.24 मिलियन डॉलर में बिकी।

विश्व की सबसे महँगी साड़ी राजा रवि वर्मा के चित्रों की नकल से सुसज्जित है। बेशकीमती 12 रत्नों व धातुओं से जड़ी, 40 लाख रुपये की साड़ी को दुनिया की सबसे महँगी साड़ी के तौर पर Guinness Book of World Records में शामिल किया गया।

2014 में, राजा रवि वर्मा के जीवन पर आधारित एक फिल्म रिलीज़ हुई, जिसका नाम ‘रंगरसिया’ था, जिसमें अभिनेता रणदीप हुड्डा और नंदना सेन ने अभिनय किया था।

58 साल की उम्र में राजा रवि वर्मा ने 2 अक्टूबर 1906 को दुनिया से अलविदा कह दिया।

उनकी व्यापक रूप से स्वीकृत रचनाओं में हंस से बात करती हुई दमयंती, दुष्यंत को देखती हुई शकुंतला, अपने बालों को सजाती हुई नायर लेडी, और शांतनु और मत्स्यगंधा की तस्वीर शामिल हैं।