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International Nurses Day : इस महामारी में माँ का रूप है सिस्टर

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सेवा को परम धर्म मानने वाली नर्सें, एक मरीज के जीवन में बहुत मत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

नर्सों के बिना स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी है। वे अपने पूरे ज्ञान, अनुभव और मेहनत से एक मरीज की देखभाल करती हैं।

भारत में नर्सों को सिस्टर का भी संबोधन दिया जाता है।

हर साल 12 मई को International Nurses Day के रूप में मनाया जाता है।

इसी दिन यानी 12 मई को आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिन को ही अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के तौर पर मनाने का फैसला लिया गया।

वह एक अंग्रेजी नर्स, एक समाज सुधारक और एक सांख्यिकीविद् थीं जिन्होंने आधुनिक नर्सिंग के प्रमुख स्तंभों की स्थापना की।

अमेरिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण विभाग की एक अधिकारी डोरोथी सुदरलैंड ने पहली बार नर्स दिवस मनाने का प्रस्ताव 1953 में रखा था। पहली बार इसे साल 1965 में मनाया गया था।

जनवरी 1974 में, International Council of Nurses द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने की घोषणा की गई।

Lady with the Lamp के नाम से जानी जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक के रूप में काम शुरू किया, जो कि क्रीमियन युद्ध के दौरान घायल हुए ब्रिटिश और संबद्ध सैनिकों के एक नर्सिंग प्रभारी के रूप में काम करने लगे।

वह नर्सों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण स्थापित करने वाली पहली महिला थीं।

The Nightingale School of Nursing जो की पहला नर्सिंग स्कूल था, का उद्घाटन 1860 में लंदन में हुआ था।

फ्लोरेंस पहली महिला थीं जिन्हें Order of Merit 1907 से सम्मानित किया गया था।

अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ बनकर नर्सें लगातार मरीजों को सेवा प्रदान कर रही हैं।

इस दिन इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा नर्सों को किट भी बांटी जाती है इसमें उनके काम आने वाली सामग्री होती है।

इस साल International Nurses Day का थीम A Voice to Lead-A Vision for Future Healthcare यानी की ‘नेतृत्व के लिए एक आवाज: भविष्य के स्वास्थ्य के लिए दृष्टि’ रखा गया है।

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