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Karl Marx Birth Anniversary: एक प्रभावशाली शख्सियत की प्रशंसा और आलोचना

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इतिहास खुद को दोहराता है, पहले एक त्रासदी की तरह, दूसरा एक मज़ाक की तरह।

आज जर्मन दार्शनिक Karl Marx की 203 वीं जयंती है।

मार्क्स को मानव इतिहास के सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है और उनके काम की प्रशंसा और आलोचना दोनों हुई है।

कार्ल मार्क्स जर्मन, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, दार्शनिक, राजनीतिक सिद्धांतकार, समाजशास्त्री, पत्रकार और वैज्ञानिक समाजवाद के प्रणेता थे।

इनका पूरा नाम Karl Heinrich Marx था।

इनका जन्म 5 मई 1818 को जर्मनी में Trier के एक यहूदी परिवार में हुआ था।

उनका परिवार यहूदी था लेकिन उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए मजबूर किया गया था।

17 वर्ष की आयु में वह University of Bonn में कानून की शिक्षा प्राप्त करने गए लेकिन अगले ही वर्ष उन्होने कानून की पढ़ाई को छोड़ कर दर्शन और इतिहास का अध्ययन प्रारम्भ किया।

मार्क्स ने Tavern Club की अध्यक्षता की, जो अधिक अभिजात वर्ग के छात्र संघों के साथ था, और फिर वे एक कवि क्लब में शामिल हो गए जिसमें कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे।

मार्क्स ने प्रेस की स्वतंत्रता की भी वकालत की और उस समय सेंसरशिप की आलोचना की जब राजनीतिक शासन काफी प्रतिकूल था। यह अखबार Cologne में आधारित था, जो Prussia के सबसे औद्योगिक रूप से उन्नत खंड का केंद्र था।

1839-41 में उन्होंने Democritus और Epicurus के प्राकृतिक दर्शन पर शोध-प्रबंध लिखकर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

1843 में मार्क्स का विवाह उनके बचपन की मित्र Jenny von Westphalen से हुई।

1845 में वह फ्रांस से निष्कासित होकर ब्रूसेल्स चले गये और वहीं उन्होंने जर्मनी के मजदूर सगंठन और ‘कम्युनिस्ट लीग’ के निर्माण में सक्रिय योग दिया।

1848 में मार्क्स के नव स्थापित समाचार पत्र Neue Rheinische Zeitung का संपादन प्रारंभ किया और उसके माध्यम से जर्मनी को समाजवादी क्रांति का संदेश देना आरंभ किया।

उनका ‘The Communist Manifesto’ हजारों को प्रेरित करता है और ‘Das Kapital’ को समाजवादी आंदोलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है।

अपनी राजनीतिक दर्शन और आर्थिक परियोजनाओं से परे, मार्क्स ने जेनी को कई प्रेम कविताओं, इटली के एक पर्वतीय शहर में एक नाटक सेट और Scorpion and Felix नामक व्यंग्य उपन्यास भी लिखा।

मार्क्स ने एक ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं विकसित की जिसने उन्हें अपने जीवन के अंतिम 15 महीनों तक बीमार रखा। 14 मार्च 1883 को 64 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हुई।

उनके द्वारा इस दुनिया को कई चीज़ें दी गई हैं, जैसे- श्रमिक वर्ग में वर्गीय चेतना और एकता को जन्म देने के साथ-साथ उसकी स्थिति मे सुधार करना, पूंजीपतियों के सम्मुख उनकी स्थिति को सबलता प्रदान करना और पूंजीवाद के खिलाफ अंतिम संघर्ष के लिए तैयार करना।

मार्क्स केवल एक विचारक नहीं थे बल्कि वह संसार के मज़दूरों के महान नेता भी थे।

मार्क्स के विचार जो Marxism के नाम से विख्यात है, वो इस बात की वकालत करता है कि मानव समाज वर्ग संघर्ष के माध्यम से विकसित होता है और समाज को संगठित करने का एक तरीका सुझाता है जहाँ श्रमिक उत्पादन के साधन होते हैं।