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यह धर्मपरायण पत्रकार, सही मायनों में थे एक क्रांतिकारी

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➜कलम को ताकत बनाकर भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ने वाले पत्रकार का एक अहम किरदार रहा है।

➜ऐसे हीं एक पत्रकार थे गणेश शंकर विद्यार्थी, जिनका आज यानी की 25 मार्च को पुण्यतिथि है।

➜देश की आजादी के लिए खुद को न्योछावर कर देने वाले और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए अपनी पहचान बनाने वाले विद्यार्थी ने मानवता की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दे दी।

➜उनके पिता मुंशी जयनारायण और माता गोमतीदेवी थीं।

1907 ई. में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में कानपुर से एंट्रेंस परीक्षा पास करके आगे की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद के कायस्थ पाठशाला कालेज में भर्ती हुए।

➜उसी समय से पत्रकारिता की ओर झुकाव हुआ और भारत में अंग्रेज़ी राज के यशस्वी लेखक पंडित सुन्दर लाल कायस्थ इलाहाबाद के साथ उनके हिंदी साप्ताहिक कर्मयोगी के संपादन में सहयोग देने लगे।

➜वह एक भारतीय पत्रकार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक नेता और एक स्वतंत्रता आंदोलन कार्यकर्ता थे।

➜गणेश, गाँधीवादी विचारों एवं क्रांतिकारी व्यक्तित्व का सम्मिश्रण थे।

➜कानपुर में दंगे के मौके पर गणेश शंकर विद्यार्थी, अपना काम छोड़ सुबह नौ बजे ही नंगे पांव दंगे रोकने निकल पड़े और घूम-घूमकर लोगों की जान बचाने का काम करने लगे।

➜वह एक ऐसे पत्रकार थे जिसने हिंदू-मुस्लिम दंगे को रोकने की कोशिश की और खुद 25 मार्च 1931 को दंगों की भेंट चढ़ गए।

➜महात्मा गांधी से वह इतने प्रेरित थे कि 16 साल की उम्र में ही किताब लिख डाली।

➜गणेश शंकर ने 1913 में प्रताप का संपादन शुरू किया था।

20 फरवरी 1929 को स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी ने नर्वल में सेवा आश्रम की स्थापना की थी।

➜25 मार्च 1931 में गणेश शंकर विद्यार्थी की शहादत के बाद इस सेवा आश्रम का नाम ‘गणेश सेवा आश्रम’ कर दिया गया।

➜समाज में शांति की इच्छा रखने वाले यह धर्मपरायण पत्रकार, सही मायनों में एक क्रांतिकारी थे।

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