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Keshavrao Baliram Hedgewar : भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देखने वाले केशवराव

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दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (RSS) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार (Keshavrao Baliram Hedgewar) का आज पुण्यतिथि है। केशवराव बलिराम हेडगेवार भारत के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। ये RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के पहले सरसंघ चालाक कहलाये। इन्हें संघ के लोग डॉक्टर साहब कह कर पुकारा करते थे। केशव बलिराम बचपन से ही अंग्रेजों से घृणा और एक क्रांतिकारी प्रवृत्ति की सोच रखते थे। इनके जीवन से जुड़े कुछ सवाल हमें आज भी कहीं ना कहीं से सुनने को मिलती ही है, जिसमें प्रमुख रूप से यह सवाल होता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के पीछे का इनका उद्देश्य क्या था? और दूसरा स्वतंत्रता की लड़ाई में केशव बलिराम का क्या किरदार था?

अगर इन सवालों की सतह से धूल हटाने की कोशिश करें तो कई विद्वानों ने इनके कार्यों पर अपने अपने सोच के अनुसार इन सवालों की सतह को साफ किया है। जो केशव बलिराम के बहुआयामी व्यक्तित्व को दिखाते हैं। 21 जून इनकी पुण्यतिथि के मौके पर RSS सहित देश के कई राजनेता तथा इनके फॉलोअर्स सोशल मीडिया के जरिए इन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

केशव बलिराम के 81वें पुण्यतिथि के मौके पर इनके जीवन के कुछ पन्नों पर लगी धूल को हटाते हुए इनके जीवन से जुड़े कुछ बातों को जानते हैं:

केशव बलिराम हेडगेवार (Keshav Baliram Hedgewar) का जन्म महाराष्ट्र के नागपुर में 1 अप्रैल 1889 को हुआ था।

स्कूल के दिनों में जब केशव बलिराम के स्कूल में अंग्रेजी इंस्पेक्टर निरीक्षण करने के लिए स्कूल पहुंचा तो केशव बलिराम ने अपने कुछ मित्रों के साथ उस इंस्पेक्टर का स्वागत ‘वंदे मातरम्’ कहकर किया था। अंग्रेज इंस्पेक्टर ने उन्हें स्कूल से निकलवा दिया था।

जिसके बाद उन्होंने अपनी मैट्रिक तक की पढ़ाई पुणे के नेशनल स्कूल से की थी।

शुरुआती दिनों में केशव बलिराम बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतिबद्ध सेनानी के रूप में नजर आते हैं।

बी.एस.मूंजे जो हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे उन्होंने केशव बलिराम को दवाइयों की पढाई करने को कहा।

केशव बलिराम 1910 में जब अपने डॉक्टर की पढ़ाई करने के लिए कोलकाता गए थे तो उस वक्त वे देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़े थे।

1914 में केशव ने नेशनल मेडिकल कॉलेज से एल.एम. की पढाई पूरी करी। एक साल की ट्रेनिंग पूरी कर 1915 में वे डॉक्टर बनकर वापस नागपुर लौटे थे।

आज जो कॉन्ग्रेस RSS के खिलाफ हर वक्त खड़ी रहती है उसी कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके थे केशव बलिराम। जब 1915 में केशव नागपुर लौटे तो वह कांग्रेस में शामिल हो गए और कुछ समय के उपरांत विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बन गये थे।

सन् 1921 में कांग्रेस के द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में सत्याग्रह कर केशव ने अपनी गिरफ्तारी दी जिसके बाद उन्हें 1 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

जब वे जेल से बाहर निकले तब तक महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। जिसके बाद वे देश की आवाज को बुलंद करने के लिए नारायण राव वैद्य एवं एबी कोल्हटकर के साथ एक मराठी दैनिक ‘स्वातंत्र्य’ के प्रकाशन की शुरूआत की।

विनायक दामोदर सावरकर और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रभावित होकर हिन्दुओं की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के बारे सोचते हुए केशव बलिराम ने 1925 में विजयादशमी पर RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।

इसके पीछे उनका सोच था कि सभी हिन्दू एक साथ इकट्ठा होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़े हो और भारत में हिन्दू संस्कृति की स्थापना हो।

केशव बलिराम ने 1936 में महिलाओं के लिए सेविका समिति की स्थापना करी थी। इन्होंने संघ के लिए दिन रात एक कर कार्य किए। यह चाहते थे की इस संघ से युवा ज्यादा से ज्यादा मात्रा में जुड़ें।

कुछ समय उपरांत उनके पेट में काफी दर्द होने के कारण उन्होंने संघ की जिम्मेदारी संघ के दूसरे सदस्यों को सौंपनी शुरू कर दी। जिसके बाद संघ के दूसरे संचालक एम.एस. गोलवलकर बने।

महज 51 साल की उम्र में केशव बलिराम का नागपुर में निधन हो गया। आपको बता दें इनकी समाधि रेशम बाग नागपुर में स्थित है।