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Biharnama : अपनी भव्यता के लिए मशहूर है बिहार के इस जगह का दुर्लभ आमों का बगीचा

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फलों का राजा कहा जाने वाला आम (Mango) किसे पसंद नहीं होता। आम की अनेकों प्रजातियां विश्व भर में पाई जाती हैं। अल्फांसों, लंगड़ा, दशहरी, जर्दालू, चौसा, कृष्णभोग और ना जाने कितने और तरीके के आम की प्रजातियां दुनिया भर में मौजूद हैं। बिहार के बक्सर जिला में एक बाग है जहाँ तकरीबन 50 आम की प्रजातियां एक जगह पर मौजूद हैं।

यह जगह है बक्सर (Buxer) जिले में डुमरांव स्थित बाग-ए-कला जिसे स्थानीय लोग बड़का बगीचा कहते हैं। यह बगीचा डुमरांव राज परिवार की संपत्ति है। राज परिवार इस बाग की देखभाल 100 से भी ज्यादा सालों से कर रहा है। यह बाग अपने आम की प्रजातियों के साथ-साथ अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।

इस बाग में आम के ऐसे दुर्लभ प्रजाति के पेड़ लगे हैं जो शायद ही आपको कहीं और मिलेंगे। इस के साथ ही यहाँ अन्य फल-फूल के पेड़ भी हैं जो इस बाग को और खास बनाते हैं।

अपने आम की प्रजातियों के लिए जाना जाता है डुमरांव का बाग-ए-कला

डुमरांव राज परिवार का बाग-ए-कला पूरे भारत में अपने आम की प्रजातियों के लिए मशहूर है। इस बाग में आम के लगभग 45 से 50 किस्म मौजूद हैं। यहां 1000 से भी ज्यादा आम के पेड़ लगे हुए हैं जो तकरीबन 50 अलग-अलग प्रजातियों के हैं। यह बगीचा 56 बीघा में फैला हुआ है। इसका रख रखाव राज परिवार करता है।

हर साल राजधानी पटना में लगने वाले मेले में यहाँ के आम और अन्य फल जाते हैं। यहाँ के आमों ने प्रतियोगिता में जीत भी पायी है। 2019 में लगे कृषि मेले में इस बाग के आम प्रथम, दूसरे और तीसरे तीनों ही स्थान पर आए थे।

यहाँ हर वह आम मौजूद है जिसे उत्कृष्ट किस्म का माना जाता है। चाहे तो वह लंगड़ा आम हो या दूधिया। कृष्णभोग हो या जर्दालु। चौसा हो या दशहरी।या फिर छोटे पौधे वाला आम्रपाली। आम के इतने प्रकार के पेड़ लगे हैं जिन्हें पूरा याद रख पाना मुश्किल है।

अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए भी है मशहूर

डुमरांव का बड़का बगीचा अपनी सुंदरता और भव्यता के लिए भी जाना जाता है। 56 बीघा में फैला यह बगीचा अनेकों किस्म के पेड़ों का घर है वहीं कई प्रकार के पंछियों का भी यह बसेरा है। इस बगीचे के पूर्वी हिस्से में एक विशाल तालाब भी है जिसके चारों ओर पेड़ लगे हुए हैं। इस तालाब के एक तरफ सालों पुराना शिव मंदिर भी है जिसका निर्माण कब कराया गया था यह कहना मुश्किल है।

पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में है बाग की अहम भूमिका

55 बीघा में फैला यह बाग, बागवानी कला एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस बाग में लगे हज़ारों वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में काफी सहायक हैं। राज परिवार का कहना है कि पूरे जिले में शायद ही किसी दूसरे स्थान पर इतने वृक्ष एक साथ होंगे। वृक्षों की वजह से यहां अलग-अलग तरह के पंछी भी खूब रहते हैं।

बिहार में अल्फांसो यहीं मिलेंगे

दुनिया भर में मशहूर अल्फांसो आम के भी इस बगीचे में कई पेड़ हैं। राज परिवार के सदस्य कहते हैं कि कई लोगों ने कहा था कि अल्फांसो आम का पेड़ बिहार की जलवायु में नहीं टिक सकता। लेकिन यहां अल्फांसों आम के एक दर्जन पेड़ हैं। उनमें फल भी आ रहे हैं।

दुर्लभ ‘खात्मा विलखेर’ प्रजाति की आम हैं इस बाग की पहचान

खात्मा विलखेर आम का नाम बहुत कम लोग ही जानती हैं। यह आम की एक उत्कृष्ट प्रजाति है जो कि डुमरांव के बड़का बगीचा में है। यह आम अल्फांसो आम से मिलता जुलता दिखता है और इसका आकार अल्फांसो से थोड़ा छोटा होता है। इसके अंदर रेशे होते हैं और इसका स्वाद बहुत ही बेहतरीन होता है। राज परिवार के लोग बताते हैं कि यह आम की प्रजाति सालों साल पहले अफगानिस्तान से आई थी। हालांकि अब ये प्रजाति अफगानिस्तान से भी विलुप्त हो गयी है।

राज परिवार के अनुसार रोहतास के कोआथ नवाब ने तकरीबन 100 साल पहले उस वक़्त महाराज केसव प्रसाद सिंह को खात्मा विलखेर के तकरीबन 150 पेड़ दिए थे। अभी बड़का बगीचा में इसके तरीबन 40 पेड़ बचे हैं। राज परिवार के अनुसार इस प्रजाति के कुछ पेड़ भोजपुर कोठी में लगे हुए हैं बाकी इस आम की प्रजाति को कहीं नहीं देखा गया है

अन्य प्रकार के पेड़ भी हैं यहां मौजूद

यहां आम के ढेरों किस्म के पेड़ होने के साथ-साथ अन्य फल इत्यादि के पेड़ भी मौजूद हैं। यहाँ अनार, अमरूद, निम्बू, लीची, सफेद बेर, संतरा, अमड़ा, शहतूत, कटहल, पिस्ता इत्यादि के पेड़ भी लगे हुए हैं। यहां फूल जाम का एक विशाल वृक्ष है जो ऊपर से अब टूट गया है। लोग बताते हैं कि वह डुमरांव का सबसे लंबा पेड़ हुआ करता था।

रोली का इस्तेमाल तो हम सब ने किया होगा पर बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि रोली पेड़ पर उगती है। इस बगीचे में रोली का भी पेड़ भी है जिसके फल से रोली बनती है। इस के अलावा यहां अंगूर और चेरी के भी पौधे लगे हुए हैं।

इस बगीचे के तालाब में हमें हंस और बत्तख तैरते नजर आ जाते हैं। वहीं पेड़ों पर कूकती कोयल की आवाज़ भी सुनाई देती रहती है। इस बगीचे में मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले डायमंड डव भी देखने को मिल जाते हैं। इस बाग की सुंदरता की व्याख्या शब्दों में समेट पाना आसान नहीं है।

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