निधन-श्रद्धांजलि

RK Narayan Death Anniversary: काल्पनिक मालगुडी डेज को जीवन की सच्चाई बनाने वाले लेखक,जानिए उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

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भारत देश में, जहां सैकड़ों भाषाओं और बोलियों में रचनाएं लिखी-पढ़ी जाती हैं, वहां ऐसी कई रचनाएं हैं जो हमारी जुबान पर रहती हैं।

भाषाई विद्वानों की इसी श्रृंखला में अंग्रेजी के साहित्यकारों की लिस्ट में एक बड़ा नाम है, जिसे विभिन्न भाषाओं के लोग खूब अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं।

भारत के मशहूर लेखक और कालजयी रचनाकार R.K. Narayan की आज पुण्यतिथि है।

वे स्वतंत्रता के बाद के पहले लेखक हैं जिन्होंने अंग्रेजी में भारतीय लेखन से परिचित कराते हुए पश्चिमी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

दक्षिण भारत के चेन्नई में 10 अक्टूबर 1906 को जन्मे R.K. Narayan को एक बड़े कहानीकार के रूप में याद किया जाता है।

उनका पूरा नाम Rasipuram Krishnaswami Iyer Narayanaswami था।

उनके पिता एक स्कूल में अध्यापक थे, और नारायण ने अपने पिता के स्कूल में अपनी पढ़ाई की थी।

उन्होंने अपना ज्यादा समय मैसूर में पढ़ाई करते हुए बिताया। नारायण ने उस दौरान बच्चों को पढ़ाया, पत्रकारिता की और लेखन को भी बहुत समय दिया।

नारायण की पहली प्रकाशित कृति एक पुस्तक समीक्षा थी। 17वीं सदी के इंग्लैंड के समुद्री कानूनों का विकास उनके द्वारा समीक्षा की जाने वाली पुस्तक थी।

उन्होंने एक काल्पनिक शहर मालगुडी को आधार बनाकर अपनी अनेक रचनाएँ की थी, जिसे प्रायः दक्षिण भारत का एक काल्पनिक कस्बा माना जाता है।

मालगुडी डेज की रचना ने भारतीय अंग्रेजी साहित्य शैली को वैश्विक मंच पर पेश करने और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनका पहला उपन्यास Swami and Friends 1935 ई॰ में प्रकाशित हुआ। काल्पनिक मालगुडी में स्थापित उनका यह पहला उपन्यास है, जिसने ब्रिटिश और स्वतंत्रता के बाद के भारत के परिवर्तनकारी मिलन को खूबसूरती से दिखाया।

‘मालगुड़ी डेज’ के एपिसोड का प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया था।

नारायण आम तौर पर मानवीय रिश्तों की ख़ासियत और भारतीय दैनिक जीवन की विडंबनाओं को चित्रित करते हैं, जिसमें आधुनिक शहरी अस्तित्व प्राचीन परंपरा के साथ टकराता है।

नारायण को American Academy of Arts and Letters के मानद सदस्य के रूप में चुना गया था।

उन्होंने Royal Society of Literature द्वारा प्रस्तुत AC Benson पदक जीता।

उन्होंने पद्म विभूषण और पुरस्कार पद्म भूषण जीता, जो की भारत का दूसरा और तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है।

सन् 1960 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित ‘The Guide’ नारायण की रचनात्मकता का शिखर है। इसे उनका श्रेष्ठतम उपन्यास माना गया है।

उनके उपन्यास द गाइड को Broadway Theatre New York में एक स्टेज रिप्रजेंटेशन के लिए एडाप्ट किया गया था।

उन्होंने University of Leeds से अपना पहला मानद डॉक्टरेट प्राप्त किया।

उन्हें भारतीय संसद के ऊपरी सदन ‘राज्य सभा’ के लिए भी नामित किया गया था।

The English Teacher, The Financial Expert, Waiting for the Mahatma, My Dateless Diary, The Man-Eater of Malgudi, और कई अन्य साहित्यिक कृतियों को उनके द्वारा लिखा गया है।

उनकी मृत्यु 13 मई 2001 को 94 साल के उम्र में हुई।

8 नवंबर 2019 को, उनकी पुस्तक Swami and Friends को BBC के 100 उपन्यासों में से एक के रूप में चुना गया था जिसने हमारी दुनिया को आकार दिया।

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