निधन-श्रद्धांजलि

Padmashree Dr. Manas Bihari : नहीं रहें ‘तेजस’ बनाने वाले पद्मश्री डॉ. मानस बिहारी

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देश को जिस ‘तेजस’ (Tejas) पर गर्व है, उस फाइटर जेट को बनाने में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान देने वाले साइंटिस्ट डॉ मानस बिहारी वर्मा (Dr. Manas Bihari Verma) अब हमारे बीच नहीं रहे।

दरभंगा के एक गांव से निकल कर देश ही नहीं दुनिया में अपना नाम रौशन करने वाले मानस बिहारी वर्मा का हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से वो अस्वस्थ भी थे, लेकिन 3 मई की रात को उन्हें हार्ट अटैक आया जिससे उनकी मौत उनके दरभंगा (Darbhanga) स्थित निवास स्थान हो गई।

पद्मश्री (Padmshree) मानस बिहार वर्मा का जन्म दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड के एक गांव में हुआ था। तीन भाई और चार बहनों का परिवार में जन्मे मानस बिहारी की स्कूली शिक्षा मधेपुर के जवाहर हाई स्कुल से पूरी हुई ।

जिसके बाद वे पटना के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और कलकत्ता विश्वविद्यालय से अध्यन किया था।

उन्होंने अपने जीवन का 35 साल DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर देश के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में अपना योगदान दिया।

उन्होंने बैंगलोर, नई दिल्ली और कोरापुट में स्थापित विभिन्न वैमानिकी विभागों में भी काम किया था। उन्हें लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने का मौका भी मिला।

साल 2005 में सेवानिवृत्त होने के बाद बेंगलुरु में राजसी जीवन को त्याग कर अपने गांव चले गए थे। जिसके बाद उन्होंने दरभंगा जिले के गांव के हर स्कूलों से जुड़े।

जहां उनकी टीमों को पता चलता था कि जिन स्कूलों में विज्ञान शिक्षक का अभाव रहता है, वहां उनके टीम मेंबर बच्चों को प्रयोग कराते हैं। मोबाइल वैन के जरिये एक स्कूल में दो से तीन माह कैंप कर बच्चों को विज्ञान और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी दी जाती है।

मानस बिहारी को उनके द्वारा किए गए कामों के लिए कई सामानों से सम्मानित किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. मानस बिहारी वर्मा को साइंटिस्ट ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया था। 2018 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। इनके निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट करते हुए शोक जताया।