निधन-श्रद्धांजलि

कोरोना से जीत कर भी जिंदगी से हार गए Homen Borgohain, कुछ ऐसा रहा इस साहित्यकार का जीवन

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आसाम के प्रख्यात साहित्यकार एवं पत्रकार होमेन बोर्गोहैन (Homen Borgohain) कोरोना से जिंदगी की जंग जीतने के बाद भी हार गए। होमेन 12 मई को गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। 24 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे और 7 मई को उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई। कोरोना से जीतने के बाद भी 88 वर्ष के होमेन की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इनके मौत से साहित्य जगत में शोक का माहौल हो चुका है।

जानें होमेन बोर्गोहैन के जीवन के कुछ पन्ने :-

होमेन का का जन्म साल 1932 में 7 दिसंबर को आसाम में हुआ था।

मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद होमेन हायर एजुकेशन के लिए गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज गए थे।

उनकी शादी उनके समय की एक फेमस राइटर निरुपमा तमोली (Nirupama Tamuli) से हुआ था।

दोनों पति-पत्नी ने एक साथ एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम है Puwar Purobi Sandhyar Bibhash.

होमेन बोर्गोहेन को 1978 में असमी भाषा में अपने उपन्यास “पिता पुत्र” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया।

कुछ साल पहले जब बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ कई साहित्यकारों ने अपना पुरस्कार लौट आया था तब होमेन ने भी अपने पुरस्कार को लौटाने का फैसला लिया था।

वह अपनी जिंदगी के आखिरी समय में असाम की Daily Niyomiya Barta में चीफ एडिटर के स्थान पर कार्यरत थे।

उन्होंने कई नोबेल और शार्ट स्टोरीज लिखी थी जिसे काफी पसंद किया जाता दी गई थी।

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