निधन-श्रद्धांजलि

Gauri Amma : नहीं रही केरल राजनीति की ‘आयरन लेडी’ (Iron Lady) गौरी अम्मा, जानिए उनके जीवन का सफर

gouri amma
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केरल (Kerala) की राजनीति में हमेशा आयरन लेडी (Iron Lady) के नाम से जानी जाने वाली गौरी अम्मा (Gauri Amma) का निधन हो गया। वे 1957 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व वाली पहली कम्युनिस्ट सरकार की सदस्य रहीं थी। के आर गौरी अम्मा (K R Gauri) का निधन मंगलवार यानी 11 मई को हुआ। गोरी अम्मा 102 वर्ष की थीं। वह बुढ़ापे से संबंधी बीमारियों के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। मिली जानकारी के मुताबिक गौरी अम्मा ने 10 मई की सुबह आईसीयू (ICU) में अंतिम सांस ली।

  • गौरी अम्मा का जन्म तटीय अलप्पुझा के पट्टनक्कड़ गांव में 14 जुलाई, 1919 को के ए रमनन और पार्वती अम्मा के घर हुआ था। युवावस्था से ही उनकी राजनीति में रुचि थी।
  • अम्मा केरल की सबसे शक्तिशाली महिला नेताओं में से एक मानी जाती थी।
  • गौरी अम्मा केरल की पहली राजस्व मंत्री (Revenue Minister) बनी थी।
  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से 1994 में निष्कासित किया गया था।
  • पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद गौरी अम्मा ने अपने दल जनाधिपत्य संरक्षण समिति (जेएसएस) का गठन किया। जो प्रदेश में कांग्रेस नीत यूडीएफ का घटक बना।
  • गौरी अम्मा के कैबिनेट सहयोगी रहे टी वी थॉमस से शादी हुई थी और थॉमस का निधन साल 1977 में हुआ था।
  • नंबूदरीपाद मंत्रालय में राजस्व मंत्री रहीं गौरी अम्मा को क्रांतिकारी कृषि संबंध विधेयक लाने में अहम भूमिका के लिए भी जाना जाता है।
  • 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद, गौरी अम्मा माकपा में शामिल हुईं, जबकि उनके पति भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) में रहे।
  • वह 1948 में कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुईं और इसी साल जेल गईं। बेबाक होकर अपने विचार रखने वाली गौरी अम्मा 1952 और 1954 में त्रावणकोर-कोच्चि विधानसभा सीट से चुनी गई थीं।
  • हाल ही में गौरी अम्मा ने जनप्रतिनिधि समृद्धि समिति (जेएसएस) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
  • 1994 से गौरी अम्मा पार्टी के गठन के बाद से ही इस पद पर थी।
  • गौरी अम्मा ने 1957, 1967, 1980 और 1987 में केरल में कम्युनिस्ट नेतृत्व वाले मंत्रालयों में मंत्री रही थी।
  • वह 2001 से 2006 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में कृषि मंत्री बनी रही थी।
  • उन्होंने 1987 में महिला आयोग विधेयक का मसौदा तैयार करने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • कई किसान आंदोलनों में भाग लिया और जेल भी गईं थीं।
  • केरल की राजनीति में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राजनेताओं में से एक थी।
  • वह 1952 और 1954 में भारी बहुमत के साथ त्रावणकोर विधान सभा के लिए चुनी गईं थीं।

जनप्रतिनिधि समृद्धि समिति बनने के बाद, वह यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) में शामिल हो गईं और एके एंटनी और ओमन चांडी कैबिनेट में मंत्री थीं। हालांकि बाद में उन्होंने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट छोड़ दिया था।