पुरस्कार/सम्मान

2020 का सरस्वती सम्मान, ‘शरणकुमार लिम्बाले’ के नाम

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मराठी उपन्यासकार, कवि, आलोचक और लघु कथाकार ‘शरणकुमार लिम्बाले’ (Sharankumar Limbale) को 2020 सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। यह एक प्रतिष्ठित साहित्यिक मान्यता है जिसे केके बिड़ला फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है। डॉक्टर शरण कुमार लिंबाले के मराठी उपन्यास ‘सनातन’ को वर्ष 2020 के तीसवें सरस्वती सम्मान के लिए चुना है।

इस कार्य का चयन विद्वानों और लेखकों की एक समिति ने किया, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी कश्यप ने की। चयन प्रक्रिया तीन-स्तरीय थी और इसमें 22 भाषाओं के उत्कृष्ट काम को खोजने के लिए गहन तुलनात्मक अध्ययन शामिल था। ‘सनातन’, दलित संघर्ष का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और ऐतिहासिक दस्तावेज है। इस लेखक ने कई कल्पनाशील पात्रों और स्पेस का उपयोग करते हुए इस उपन्यास को लिखा है। उन्होंने इतिहास के साथ इस उपन्यास की कहानी को शानदार ढंग से बुना है।

यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी भारतीय नागरिक की एक ऐसी उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है, जो भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में उल्लिखित किसी भी भाषा में सम्मान वर्ष से ठीक पहले 10 वर्ष की अवधि में प्रकाशित हुई हो। 1 जून, 1956 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में जन्मे लिम्बले ने मराठी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर से मराठी दलित साहित्य और अमेरिकन ब्लैक साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में पीएचडी की।

1991 में के के बिड़ला फाउंडेशन द्वारा स्थापित सरस्वती सम्मान देश में सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह पुरस्कार पंद्रह लाख रुपये, एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका प्रदान करता है। पहला सरस्वती सम्मान 1991 में हरिवंश राय बच्चन को उनकी आत्मकथा के लिए प्रदान किया गया था। इनके अवाला रमाकांत रथ, प्रो. के. अय्यप्प पणिक्कर, गोविंद मिश्र, डॉक्टर एम.वीरप्पा मोइली समेत अन्य शामिल हैं।

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