बिहार के तीन युवाओं ने ‘मैगटैप’ (MagTapp)  नाम का वेब ब्राउज़र बनाया है। यह  पीएम मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के  सपने का ही एक बेहतरीन उदाहरण है।  चीन से झड़प और भारतीय जवानों की शहादत के  बाद से ही भारत में एक बार फिर चीनी समान और ऐप्स के बहिष्कार की मांग उठने लगी है। ऐसे में बिहारी युवाओं द्वारा बनाया गया यह एप  चीनी एप  को चुनैती दे रहा है। इस ऐप की खासियत इसकी ‘विजुअल डिक्शनरी’ है, जिससे बड़ी आसानी से किसी भी दूसरी भाषा के शब्द का “अर्थ” चित्र सहित अपनी भाषा में देखा-सुना जा सकता है।

‘मैगटैप’ (MagTapp) के खास फीचर

“मैगटैप”  एक  ‘विजुअल ब्राउज़र’ के साथ-साथ डॉक्यूमेंट रीडर, ट्रांसलेशन और ई-लर्निंग की सुविधा देने वाला ऐप है।  इस ऐप को ख़ास तौर पर देश के हिंदीभाषी स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है।  यह ऐप अंग्रेजी के किसी भी शब्द, वाक्य या पूरे पैराग्राफ को हिंदी सहित देश की 12 भाषाओं में अनुवाद कर सकता है।  साथ ही व्हाट्सऐप, फेसबुक, मैसेंजर में भी किसी शब्द पर टैप कर उसका अर्थ जाना जा सकता है।  ऐप पर बच्चों से लेकर बैंक, रेलवे और यूपीएससी लेवल तक के कम्पटीशन एग्जाम की तैयारी करने लायक स्टडी मटेरियल टेक्स्ट और वीडियो फॉर्मेट में मुफ्त में उपलब्ध है।

स्टार्टअप इंडिया से सर्टिफाइड भारत में निर्मित 32 एमबी का यह स्वदेशी एप चाइनीज ‘यूसी ब्राउजर’ (UC Browser) और ‘डब्ल्यूपीएस ऑफिस’ (WPS Office) जैसे कई तरह के एप  का बेहतर विकल्प है। यह प्ले स्टोर (Play Store) पर मुफ्त  में उपलब्ध है। 12 भारतीय भाषाओँ के साथ फ्रेंच, जर्मन, इटालियन और अरबी समेत 29  विदेशी  भाषाओं में भी अनुवाद कर  सकता है।   देश के लोगो को साथ साथ विदेश के लोग भी इसका इस्तेमाल आसानी से कर  सकते है। ‘मैगटैप’ एप  को अब तक 10 लाख से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं  जबकि, अबतक  यूजर  ने इसे 4.5  रेटिंग दी है।

‘मैगटैप को डेवलप करने वाले रोहन कुमार का कहना है कि उन्होंने अभी ही इसका अपडेटेड वर्जन ‘मैगटैप 2.0’ लांच किया है। अपडेट में कई सुविधाएं जोड़ी गयी हैं, जिससे यह एप चीन के यूसी ब्राउज़र के साथ ही गूगल के क्रोम और ओपेरा ब्राउज़र से भी बेहतर साबित होगा।

एप के तीनों फाउंडर सत्यपाल चंद्रा, रोहन सिंह और अभिषेक बिहार के गया और समस्तीपुर के रहने वाले हैं। एप का आइडिया सत्यपाल चंद्र का है। 2019 में सत्यपाल चंद्रा ने  रोहन सिंह की मदद से  ‘मैगटैप” को बनाया । ‘मैगटैप’ को रोहन ने डिजाइन किया है।  इसके टेक्निकल पक्षों को संभालने में उनके 18 साल के भाई अभिषेक सिंह मदद करते हैं।

ऐसे आया एप बनाने का आइडिया

सत्यपाल चंद्रा जो ‘मैगटैप’ के सीईओ है , बताते है — एक बार बिहार से कोलकाता जाने के दौरान मैं  एक लड़की मीरा से मिला जो कड़ी धूप में अपने परिवार के साथ एक चाय के ढाबे पर काम कर  रही थी। काम खत्म होते ही वह अपने स्कूल का असाइंगमेंट पूरा करने के लिए इंटरनेट पर कुछ खोजने  लगी। पर उसे सफलता नहीं मिली।

चंद्रा कहते है ” हममे से अधिकतर लोग यह सोचते है की इंटरनेट पर सब कुछ मुमकिन है ” पर ऐसा  नहीं है। इसके पीछे कारण यह है की इंटरनेट पर मौजूद 90 प्रतिशत  सूचनाएं आज भी इंग्लिश में मौजूद है।  तब ऐसे लोगो का क्या जिन्हे इंग्लिश पढ़ने और समझने में परेशानी है। उन्होंने  ने तभी निश्चय किया की मुझे कुछ बदलना है। इस तरह उनके दिमाग में  ‘मैगटैप’ का विचार आया।  सत्यपाल खुद नक्सल प्रभावित गया के इमामगंज प्रखंड के रहने वाले है।  अभाव और गरीबी के बीच प्रारंभिक पढाई पूरी कर कमाने के इरादे से दिल्ली चले गए। दिल्ली के ही एक रेस्टोरेंट में उन्हें इंग्लिश न जानने की वजह से वेटर ने झिड़क दिया। इसके बाद सत्यपाल ने करीब 6 माह दिनरात मेहनत कर अंग्रेजी बोलना-लिखना सीखा और एक के बाद एक कई अंग्रेजी उपन्यास लिख डाले। उनकी किताबें ‘द मोस्ट इलिजिबल बैचलर’ और ‘व्हेन हेवेन्स फॉल डाउन’ काफी चर्चित रही हैं. किताबें लिखने के बाद उन्होंने वेब सीरीज भी बनाईं और अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में नाम कर रहे है।

 रोहन सिंह समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के निवासी और आर्मी पर्सन सूबेदार पवन सिंह के बेटे रोहन सिंह 19 साल की उम्र में ही वेब डेवलपर बन गए थे।  वह 12वीं की पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से उपन्यासकार के तौर पर चर्चित हो चुके सत्यपाल चंद्रा के संपर्क में आए।  इसके बाद दोनों ने मिलकर ‘मैगटैप’ बनया। ‘मैगटैप’ के फाउंडर और सीपीओ (CPO) रोहन इसके आलावा कई एप और वेबसाइट डिज़ाइन कर चुके है साथ ही हजारों  बच्चो को डिजिटल मार्केटिंग भी पढ़ा चुके है।
अभिषेक सिंह मैगटैप’ के फाउंडर और CTO अभिषेक कंप्यूटर लैंग्वेज के जानकर है। उन्हें  MongoDB, NodeJS, Angular, AWS Lambda, DynamoDB, S3, Kotlin, JAVA, Cloudfront, PHP, MySQL, JavaScript, Linux, Ethical Hacking  और WordPress जैसे लैंग्वेज में एक्सपर्ट है। वह कई एंड्राइड और वेब अपल्लीकेशन पर काम कर  चुके है।