नकली वस्तुओं का उत्पादन एवं सस्ता माल निर्यात करने वाले चीन का प्रभुत्व समाप्त करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अब निरंतर आगे बढ़ रहा है। चाइनीज आर्टीफिशियल आभूषण, मोतियों की माला आदि विश्व में जड़ें जमा चुकी थीं जो अब हिलने लगी हैैं। दवा व्यवसाय को छोड़कर लॉकडाउन में तमाम उत्पादों का निर्यात घट गया था वहीं बनारस बीड्स के उत्पादों का करीब 50 फीसद निर्यात बढ़ गया। भारत ही नहीं अन्य देशों में लोग चाइनीज सामान को ना कहने लगे हैं। विदेशियों को अब काशी की मोतियों की माला भाने लगी है। वाराणसी एवं आसपास के व्यापारियों ने करीब 5 करोड़ के चीनी उत्पाद का आर्डर रद कर बड़ा संदेश पहले दे दिया है।

केंद्र एवं प्रदेश सरकार की मदद से वाराणसी में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सीएफसी (कामन फेसिलिटी सेंटर) बनकर तैयार है। इसमें सरकार का 70 एवं बनारस बीड्स लिमिटेड का 30 फीसद शेयर है। इसमें आधुनिक मशीनें लगेंगी, जिनसे ग्लास एवं बीड्स आइटम बनेंगे। संयुक्त आयुक्त, उद्योग उमेश कुमार सिंह के अनुसार प्रोजेक्ट 14.53 करोड़ का है। मशीनें मंगाने को टेंडर जारी हो गया है। उम्मीद है छह माह बाद उत्पादन शुरू होगा।

हाल ही में बनारस इंडस्ट्रियल एंड ट्रेड एसोसिएशन ने पीएम मोदी को पत्र भेजकर आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का सुझाव दिया है, खासकर चीनी उत्पाद पर। इससे स्थानीय बाजार जोर पकड़ेगा, सरकार की आय बढ़ेगी। क्योंकि कुटीर उद्योग, जीआइ और लघु उद्योगों के उत्पादों का यूपी सबसे बड़ा निर्यातक है। यहां के नकली आभूषण, ग्लास बीड्स, हस्तकला व अन्य जीआइ उत्पाद का निर्यात में बड़ा योगदान है। ऐसे चीन से आयातित इन वस्तुओं पर शुल्क 20 की जगह 50 फीसद किया जाए।बनारस बीड्स लिमिटेड के सीएमडी अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि अप्रैल व मई में ही काशी से तीन करोड़ का उत्पाद निर्यात किया गया। यह करीब 50 फीसद अधिक है। यहां की मोती की माला, बच्चों के मोती के खिलौने, ग्लास बीड्स, फैंसी ग्लास आर्ट वेयर, नकली आभूषण व अन्य उत्पाद को तवज्जो मिलने से चीन की जड़ें कमजोर होने लगी हैं।

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