भारत में पहला बाल भवन बनवाने और समाज के उत्थान में अपना सारा जीवन व्यतीत करने वालीं  पद्म श्री विद्याबेन शाह  अब हमारे बिच नहीं है। आइये उनके जीवन के सार को देखते है।

यह तो सभी जानते है की मानव मस्तिष्क चीजों को थोड़े समय तक ही याद रख  पाता  है।  आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1960 में कहा  था “भारतीय और विदेशी  लोग ऐसे हस्तियों को बहुत थोड़े समय के लिए याद रखते है ,जिन्होंने अपना पूरा जीवन, देश और समाज कल्याण में लगा दिया।  

यह दुखद है की भारतीय लोगो ने एक ऐसी ही सामाजिक कार्यकर्ता विद्याबेन शाह और उनके द्वारा किये गए कार्यो को भुला दिया। पद्म श्री से सम्मानित विद्याबेन का निधन 19 जून को उनके दिल्ली स्थित आवास पर हो गया। वह 98 वर्ष की थी। उनका जन्म 7 नवंबर 1922 को गुजरात में हुआ था।

विद्याबेन शाह एक सामाजिक कार्यकर्ता ,स्वतंत्रता सेनानी और ऐसी कार्यकर्ता थी, जिन्होंने लगभग 80 सालो से अधिक समय तक भारतीय समाज के लिए बिना किसी स्वार्थ के काम करती रही। जब वह केवल 11 वर्ष की थी और “वनीता विश्राम हाई स्कूल” ,राजकोट में पढ़  रही थी ,तभी उनका संपर्क उर्मिला मेहता जो वही पास के कॉलेज “बार्टन ट्रेंनिंग कॉलेज” की प्रिंसिपल थी,  से हुआ। उर्मिला मेहता से प्रभावित होकर वह ,स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ी। स्कूली छात्रों के बीच अहिंसा का संदेश देकर उन्होंने हलचल मचा दिया। कॉलेज में पहुंचने के बाद उन्होंने गाँधी  जी के निर्देश पर “भारत छोड़ो आंदोलन” में भी हिस्सा लिया।

साल 1933 , से उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र और समाज कल्याण में समर्पित कर  दिया। विद्याबेन शाह अपने पति मनुभाई शाह के साथ मिलकर शिक्षा , बाल कल्याण , वरिष्ठ नागरिक कल्याण ,महिला एवं परिवार कल्याण , दिव्यांगजन कल्याण , कला एवं संस्कृति  जैसे कई  क्षेत्रों  में सुधार  कार्य किया।

साल 1975 में  विद्याबेन शाह  नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् ( NDMC )   की प्रमुख बनने वाली पहली गैर-सरकारी अधिकारी थी। वह 1995 से लेकर 1998 तक केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड (CSWB) की अध्यक्ष भी रही। वह 1948 में जुवेनाइल कोर्ट ,राजकोट की पहली मजिस्ट्रेट भी बनी  थी। इसके  आलावा वह बाल सहयोग की अध्यक्ष 1966 में बनी  और 12  सालों तक भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW ) की अध्यक्ष भी रही।

उन्होंने  1940  में गुजरात के राजकोट में भारत का  पहला बाल भवन बनाया था। 1970 के दशक में शहर निवासियों के बिच सांस्कृतिक आदान प्रदान  के लिए  महात्मा गाँधी संस्कृति केंद्र की भी स्थापना की। उन्हें  दिल्ली के प्रतिष्ठित डांस ,म्यूजिक,और पेंटिंग  स्कूल, सरदार पटेल विद्यालय और त्रिवेणी कला संगम के स्थापना का भी श्रेय जाता है।

विद्याबेन शाह को 1992 में भारत सरकार की ओर से पद्म श्री सम्मान मिला। इसके आलावा 1986 में राष्ट्रीय पुरस्कार ,2000 में शताब्दी महिला पुरस्कार , 2006 में कल्पना चावला एक्सीलेंस अवार्ड , जैसे  ढेरो अवार्ड्स मिले।

कल्याणकारी संगठनों और नागरिक प्रशासन में ऊँचे पदों  पर कार्य करते हुए भी, विद्याबेन शाह हमेशा विनम्र और अनुग्रह से भरा जीवन जीती रही।