प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे राज्यों से लौट कर आए प्रवासी मजदूरों को उनके घर के आसपास ही रोजगार देने के लिए 50,000 करोड़ रुपये की लागत से गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की। दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान को पीएम ने रिमोट द्वारा बिहार के खगड़िया जिले के ब्लॉक बेलदौर के गांव तेलिहार से लॉन्च किया। 125 दिनों तक चलने वाले गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत देश के 116 जिलों में गांव वापस पहुंचे कम से कम हर जिले में 25000 प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया जाएगा। इसके तहत अब गांव में ही 25 तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम दिए जाएंगे।

लॉन्चिग के बाद पीएम ने कहा कि कोरोना संकट के साथ राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार को आपकी चिंता थाी। भारत के गांवों ने जिस तरह कोरोना का मुकाबला किया है वह शहरों के लिए सबक है। 85 प्रतिशत आबादी वाले गांवों के लोगों ने कोरोना के संक्रमण को बहुत प्रभावी तरीके से रोका है। पीएम ने कहा कि आप इस प्रशंसा के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आपके इस पराक्रम पर कोई आपकी पीठ थपथपाए या न थपथपाए, मैं जरूर थपथपाउंगा।

इस योजना के तहत लोगों को इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के तहत रोजगार मिलेगा। जैसे- कुंआ, तालाब निर्माण या फिर सरकारी भवन निर्मा, रिपेयरिंग, मंडियों में भंडारण के लिए मजदूरी या गांव के नहर या सड़कों के निर्माण या मरम्मत के कार्य। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गांवों में रोजगार का मेगा प्रोग्राम ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ लांच करने से पहले पंचायती राज संस्थाओं को 15वें वित्त आयोग के अनुदान की पहली किस्त जारी कर दी गई है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार, 15वें वित्त आयोग के अनुदान की पहली किस्त के रूप में पंचायतों को 15,187.50 करोड़ रुपये की राशि 28 राज्यों को दी गई है।