खेल मंत्री किरेन रीरीजू ने गुरुवार को 21वीं शताब्दी में ओलंपिक और ओलंपिक शिक्षा पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार’ के उद्घाटन सत्र के दौरान कहा,कि देश की नई शिक्षा नीति में खेल पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे और इन्हें अतिरिक्त गतिविधि नहीं समझा जाएगा। भारत की नई शिक्षा नीति में खेल भी शिक्षा का हिस्सा का होंगे और ये पाठ्येतर गतिविधि के रूप में शामिल नहीं होंगे।

’’उन्होंने कहा, ‘‘मेरा हमेशा से विश्वास रहा है कि शिक्षा एक है, खेल एक है। ये दोनों समान हैं।’’रीजीजू ने कहा कि खेल को वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं देखा जा सकता और इसे शिक्षा के रूप में स्वीकार करना होगा।उन्होंने कहा, ‘‘खेल भी एक शिक्षा है, इसलिए खेल अतिरिक्त गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते। इसलिए खेल को अतिरिक्त विषय के रूप में नहीं देखा जा सकता। खेल को शिक्षा के हिस्से के तौर पर सभी को स्वीकार करना होगा।’’रीजीजू ने कहा, ‘‘भारत की नई शिक्षा नीति को अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है लेकिन यह अंतिम चरण पर है। बातचीत के दौरान मेरा मंत्रालय पहले ही पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रख चुका है।’’रीजीजू ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड के गठन के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।‘‘मुझे यह साझा करते हुए काफी खुशी हो रही है कि हम पहले ही हमारे राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड की घोषणा कर चुके हैं। अब यह गठन की प्रक्रिया पर हैं और मैंने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है और यह समिति चर्चा कर रही है कि राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड को कैसे मूर्त रूप दिया जाए।खेल ’मंत्री देश का ‘ओलंपिक संग्रहालय’ बनाने को लेकर भी उत्सुक हैं और उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद स्थिति सामान्य होने पर इस संदर्भ में चर्चा की जाएगी।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे निजी तौर पर लगता है कि ओलंपिक संग्रहालय बेहद महत्वपूर्ण निधि है। प्रत्येक देश में इसे बनाने की जरूरत है और भारत जैसे देश में, हमारी अच्छी विरासत है, हमारे यहां यह होना ही चाहिए। शायद कोविड-19 के खत्म होने के बाद हम खूबसूरत ओलंपिक संग्रहालय के बारे में बात करेंगे, शायद दिल्ली में, शायद हमारे राष्ट्रीय स्टेडियम में… मैं भारत में ओलंपिक संग्रहालय को लेकर काफी उत्सुक हूं।