संगीत का अपना एक अलग आनंद है। अपने पसंद की संगीत सुनते ही हर इंसान को सुखद आनंद का अनुभव होता है। इस महामारी के वक़्त तनाव से मुक्त होने के लिए संगीत सबसे सुलभ साधन है। विदेशों में जहां पॉप संस्कृति हावी है। वहां भारतीय मूल के बच्चों का शास्त्रीय संगीत से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। इस खाली समय को बच्चे संगीत के गुड़ सीखने के उपयोग में ला सकते है। संतूर आश्रम के तत्वावधान में 14 जून से ग्लोबल म्युजिक फेस्ट का आयोजन किया गया है। इस फेस्ट में विश्व के विभिन्न देशों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के कलाकार व बाल कलाकार जुटेंगे और संगीत से समां बांधेंगे। चार दिवसीय यह फेस्ट 14 जून, 16 जून, 18 जून और 20 जून को होगा। सोशल मीडिया यू ट्यूब, ट्वीटर, फेसबुक व इंस्टाग्राम पर शास्त्रीय संगीत का प्रसारण होगा। प्ले ऑन ने इस फेस्ट की रूपरेखा तैयार की है। इस बारे में प्रसिद्ध संतूर वादक व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त पंडित तरुण भट्टाचार्य ने बताया कि कोरोना की महामारी में एक मंच पर इकट्ठा होकर किसी कार्यक्रम का किया जाना संभव नहीं है।

इस कारण डिजीटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर ग्लोबल म्यूजिक फेस्ट का आयोजन किया गया है। इसमें विश्व भर के 43 कलाकार हिस्सा लेंगे। इनमें 40 बाल कलाकार हैं, जबकि तीन संगीत की विविध विधाओं में दक्षता प्राप्त विशेषज्ञ हैं। इस फेस्ट में संतूर आश्रम के बाल कलाकारों के साथ-साथ अमेरिका स्थित सर्वलघु प्रक्यूशन आर्ट सेंटर के मृदंग आचार्य मनि विद्वान रमेश श्रीनिवासन के शिष्य भी शिरकत करेंगे। फेस्ट में अमेरिका, होलैंड, हैदराबाद, मुंबई, कोलकाता, हावड़ा के कलाकार हिस्सा लेंगे। इसमें अमेरिका से अर्क, श्रमन, दीया, कार्थिक, श्रवण, मधुमिता साहा, रूसी, अहिलान, प्रथम, मनीष, गणपतथी रमन व उनके पुत्र, राधिका, अगस्थ, ज्योतिषमान, नील, नाथन, राम, अश्विन, साकीथ, असविन, रमेश श्रीनिवासन, एनी मोसिसवेस्की, साथया रमेश,मॉरिस गनेन, मिहिर, वरुणादित्या, होलैंड से ओवैद आरिया, हैदराबाद से श्रीनिवास राव , हरनाथ राव, श्रीजा, सोहम, उस्ताद नजीमुद्दीन जावेद, मुंबई से समीक्षण, हावड़ा से ज्योतिर्मय (फैक्टली), आयुष, कोलकाता से श्रेष्ठ, जियाउल, सुप्रभा ( फैकल्टी), देवसागर, अभिज्ञान, अभिनव व एंकर मिनाली शिरकत करेंगे।

पंडित भट्टाचार्य ने कहा कि इस फेस्ट का उद्देश्य बच्चों को शास्त्रीय संगीत के प्रति प्रोत्साहित करना है।लॉकडाउन में जब बच्चे अपने घर में हैं। वे घर में अधिक से अधिक अभ्यास कर सकें। साथ ही विदेशों में शास्त्रीय संगीत के प्रति समर्पित लोगों को एक मंच पर लाना है। उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना भी पैदा करना है, ताकि वे और भी बेहतर कर सकें। विदेशों में जहां पॉप संस्कृति हावी है। वहां भारतीय मूल के बच्चों का शास्त्रीय संगीत से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। संतूर आश्रम की ओर से प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र भी दिया जायेगा।