5 जून को साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। 5 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर उपछाया चंद्र ग्रहण होगा।  यह चंद्र ग्रहण रात तकरीबन सवा 11 बजे से ढाई बजे तक रहेगा।  खास बात ये है कि इस ग्रहण को भारत में भी देखा जा सकेगा।  ग्रहण काल में चंद्रमा कहीं से कटा हुआ होने की बजाय अपने पूरे आकार में नजर आएगा।  ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे।  उपछाया ग्रहण को वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं माना जाता है।  हर चंद्र ग्रहण के शुरू होने से पहले चंद्रमा धरती की उपछाया में अवश्य प्रवेश करता है, जिसे चंद्र मालिन्य या अंग्रेजी में Penumbra कहा जाता है।  उसके बाद ही चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया  में प्रवेश करता है, तभी उसे चंद्रग्रहण कहते हैं।

चंद्र ग्रहण एक खगोलिय घटना है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में संरेखित होते हैं तो हम पृथ्वी की स्थिति के आधार पर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण देखते हैं। चंद्र ग्रहण उस वक्त लगता है जब पूरा चांद निकला हुआ हो और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाए। इस तरह सूर्य की किरणों को सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती हैं। यह तभी होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा दोनों के बीच आ जाए।  2020 में चार चंद्र ग्रहण हैं- एक जनवरी में हुआ था और बाकी जून, जुलाई और नवंबर में लगने वाले हैं। 5 जून को होने वाला चंद्रग्रहण उपछाया होगा। इसका अर्थ है कि चांद, पृथ्वी की हल्की छाया से होकर गुजरेगा।

पेनुमब्रल को उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं। उपच्छाया चंद्र ग्रहण ऐसी स्थिति में बनता है जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर उसकी उपच्छाया मात्र पड़ती है। इसमें चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है। इस घटना में पृथ्वी की उपच्छाया में प्रवेश करने से चंद्रमा की छवि धूमिल दिखाई देती है। कोई भी चन्द्रग्रहण जब भी आरंभ होता है तो ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करता है जिससे उसकी छवि कुछ मंद पड़ जाती है तथा चंद्रमा का प्रभाव मलीन पड़ जाता है। जिसे उपच्छाया कहते हैं। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक कक्षा में प्रवेश नहीं करेंगे  अतः इसे ग्रहण नहीं कहा जाएगा। ये पृथ्वी की परछाई से ही बाहर आ जाएंगे इसलिए ग्रहण से संबंधित किसी भी तरह का दोष अथवा दुष्प्रभाव पृथ्वी वासियों पर लागू नहीं होगा।

यह साल का दूसरा चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण 5 जून की रात को 11 बजकर 16 मिनट से शुरू हो जाएगा। फिर 6 जून की रात को 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यह चंद्रग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के ज्यादातर हिस्सों में दिखाई देगा।

उपछाया चंद्र ग्रहण की खास बातें।

1. इस घटना को नग्न आंखों के द्वारा देखा जा सकता है।  उपछाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है।  इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।
2. चंद्र ग्रहण के दौरान आप कुछ भी खा-पी सकते हैं।  इसमें किसी तरह की रोक-टोक नहीं होती है।
3. धर्म से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस दौरान सिर्फ बच्चों, बुजुर्गों और पीड़ित व्यक्तियों को ही घर से बाहर निकलने की मनाही होती है।
4. ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं कहती हैं कि ग्रहण लगना अशुभ होता है।  इस दौरान कई तरह के शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है।