वक्त और अर्थव्यवस्था कों मद्देनजर रखतें हुए लॉकडाउन में अब काफी छुट दी जा रही हैं। लेकिन याद रखें यह छुट सिर्फ और सिर्फ सरकार के तरफ से मिली है, कोरोना के तरफ से नही। इसलिए जितना संभव हो बिना कारण सिर्फ मस्ती के लिए घर से ना निकले। इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन हैं और कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जैसे-नाक बहना, सिर में तेज दर्द, खांसी और कफ, गला खराब, बुखार, थकान और उल्टी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ, निमोनिया, ब्रॉन्काइटिस आदि। करॉना वायरस की वजह से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी श्वसन तंत्र में इंफेक्शन हो जाता है। चूंकि अब तक इस बीमारी का कोई इलाज खोजा नहीं जा सका है लिहाजा बेहद जरूरी है कि खुद एहतियात बरतें।

कोरोना से बचाव में मास्क बहुत अहम भुमिका अदा करता हैं। यह सवाल ज्यादातर लोगों को जेहन में चलता है कि कोरोनावायरस से बचाव के लिए कौन सा मास्क खरीदें? 
मास्क की तेज़ी से बढ़ती ग्लोबल डिमांड की वजह से बाजार में N95 मास्क दोगुनी क़ीमत पर बिक रहे हैं। आमतौर पर जो सर्जिकल मास्क 10 रुपये में मिलता था, वो 40 रुपये से भी ज्यादा में बेचा जा रहा है, वहीं N95 मास्क आमतौर पर क़रीब 150 रुपये का मिलता है वो  500 रुपये तक में बेचा जा रहा है।

ऑनलाइन मार्केट में इस समय 3000 से 35000 रुपए तक के मास्क भी बिक रहे हैं।  लेकिन कोरोना से बचने के लिए कौन से मास्क की आपको ज़रूरत है, ये एक अहम सवाल है। दरसल कोरोना या किसी और बीमारी से बचने के लिए आम तौर पर मिलने वाला सर्जिकल मास्क किसी काम का नहीं है। इसके लिए अच्छी क्ववॉलिटी का मास्क चाहिए होता है जिसे रेस्पिरेटर कहा जाता है। लेकिन मास्क और रेस्पिरेटर में आम तौर पर लोग कन्फ्यूज़ हो जाते हैं।   डॉक्टरों का मानना है कि वायरस से बचाव के लिए N95 मास्क ही सबसे बेहतर है। यह कोरोनावायरस जैसे संक्रमण से बचाव के लिए सबसे बेहतर मास्क है। यह आसानी से मुंह और नाक पर फिट हो जाता है और बारीक कणों को भी नाक या मुंह में जाने से रोकता है। यह हवा में मौजूद 95 प्रतिशत कणों को रोकने में सक्षम है इसलिए इसका नाम N95 पड़ा है। कोरोनावायरस के कण डायमीटर में 0.12 माइक्रॉन जितने होते हैं, जिसकी वजह से यह काफी हद तक मदद करता है। यह बैक्टीरिया, धूल और परागकणों से 100 फीसदी बचाता है।  N95 मास्क में 6 लेयर होते हैं जो माइक्रो बैक्टीरिया और वायरस को अंदर आने से रोकता है।

एक मास्क को कितनी बार पहन सकते हैं।

N90 या N95 मास्क आप कितनी देर या कितनी बार पहन सकते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि आप उसे पहनकर क्या करते हैं। साधारण रुप में  N95 मास्क हर दिन बदलना चाहिए लेकिन ये हैल्थकेयर वर्कर्स या इंडस्ट्रियल प्लांट्स में काम करने वालों के लिए लागू होता है।

लेकिन अगर आप रोज़मर्रा की लाइफ़ में N90 जैसे मास्क यूज़ कर रहे हैं तो इसे 10-11 दिन पर बदल लेना चाहिए।  आपके चेहरे का पसीना या सांस का मॉइश्चर भी मास्क के भीतर अधिक दिन तक जमा होने से इंफेक्शन का ख़तरा बढ़ सकता है।
 
आप जो भी मास्क पहन रहे हैं वो प्रमाणिक तौर पर इस काबिल होना चाहिए  कि वो PM 2.5 में 95 प्रतिशत हवा को शुद्ध कर सके. यह प्रमाणन अमेरिकन NOISH, जिसने N95, N99 और N100 को अपना स्टैंप दिया है या यूरोपियन EN149 FFP2 या चाइनीज़ YY-0469 होना चाहिए।

N95 के अलावा भी बाजार मे कई मास्क उपलब्ध हैं।

सर्जिकल मास्क
N95 मास्क उपलब्ध न होने पर यह बेहतर विकल्प है। यह वायरस से 95 फीसदी बचाव करता है। वहीं बैक्टीरिया, धूल और परागकणों से 80 फीसदी तक सुरक्षा देता है। ये ढीले फिटिंग वाले होते हैं, इसलिए जब भी इसे लगाएं अच्छे से नाक और मुंह को कवर करें।

FFP मास्क
यह मास्क तीन कैटेगरी में उपलब्ध है। FFP1, FFP2 और FFP3, इसमें FFP3 सबसे बेहतर है। यह अतिसूक्ष्म कणों से बचाता है। FFP मास्क वायरस से 95 फीसदी और बैक्टीरिया-धूल-परागकणों से 80 बचाव करता है।

एक्टिवेट कार्बन मास्क
इसका इस्तेमाल आमतौर पर गंध रोकने के लिए किया जाता है। यह वायरस से बचाव करने में नाकाफी है क्योंकि महज 10 फीसदी तक ही सुरक्षा देता है। वहीं, बैक्टीरिया, धूल और परागकणों को रोकने में 50 फीसदी ही बचाव करता है

कपड़े वाला मास्क
यह वायरस से बचाव नहीं करता। न ही विशेषज्ञ इसे लगाने की सलाह देते हैं। आमतौर पर लोग इसे घर पर ही बनाते हैं। यह बैक्टीरिया, धूल और परागकण से 50 फीसदी ही बचाव करता है। इसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद डिस्पोज करना बेहद जरूरी है।

स्पंज मास्क
यह मास्क वायरस से बिल्कुल नहीं बचाता। बैक्टीरिया और धूल से महज 5 फीसदी ही बचाव करता है। एक्सपर्ट भी इसे लगाने की सलाह नहीं देते।

मास्क पहनते वक्त इन बातों का ध्यान रखें। 

  • मास्क पहनने से पहले अपने हाथों को साबुन पानी या फिर ऐल्कॉहॉल बेस्ड हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।
  •  अपनी नाक और मुंह को मास्क से अच्छी तरह से ढंक लें ताकि मास्क और चेहरे के बीच कोई गैप न रहे।
  •  मास्क पहने हुए हैं तो उसे बार-बार गंदे हाथों से टच ना करें।
  •  मास्क को हटाते वक्त उसे सामने से बिलकुल टच न करें और पीछे की तरफ से पकड़ कर खोलें और तुरंत ऐसे डस्टबिन में डालें जिसमें ढक्कन लगा हो।
  •  उसके बाद एक बार फिर हाथों को साबुन पानी या सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।

मास्क कब यूज करना चाहिए।

  • अगर आप हेल्दी हैं तो आपको मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ तभी है जब आप किसी बीमार व्यक्ति की देखरेख में लगे हैं, खासकर अगर वो करॉना वायरस से पीड़ित है।
  •  अगर आपको खांसी, सर्दी और छींक आ रही है तो मास्क का इस्तेमाल करें।
  • मास्क तभी असरदार साबित होगा जब आप उसके साथ हैंड हाइजीन का भी ख्याल रखें यानी नियमित रूप से हैंड वॉश करते रहें।