वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज को लेकर आज अंतिम किस्तों का ऐलान किए।  वित्त मंत्री बुधवार से लगातार संवाददाता सम्मेलन कर 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज से जुड़ी जानकारी किस्तों में साझा कर रही हैं। इस पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई, 2020 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में की थी। आज के ऐलान में वित्त मंत्री ने सात बड़े ऐलान किये है।

टीवी से होगी पढ़ाई

हर क्लास के बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग टीवी चैनल होगा, वन क्लास वन चैनल योजना के जरिए। रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और पॉडकास्ट का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। दिव्यांगों के लिए भी सामग्री तैयार की जाएगी ताकि वे भी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकें। मल्टीमोड एक्सेस डिजिटल/ऑनलाइन के जरिए पढ़ाई के लिए पीएम ई विद्या योजना की शुरुआत की जाएगी। दीक्षा- स्कूल एजुकेशन के लिए ई-कॉन्टेंट और क्वी आर कोड से जुड़े किताब उपलब्ध कराए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि गरीब के बच्चों तक इस समय कैसे शिक्षा पहुंचाई जाए। इसके लिए एचआरडी मंत्रालय ने अच्छा काम किया। स्वंय प्रभा डीटीएच के जरिए बच्चों को पहले से शिक्षा दी जा रही थी। इसमें 12 और चैनल जोड़े जाएंगे। लाइव सेशन के टेलिकास्ट के लिए भी इसका प्रवाधन स्काईप के जरिए किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में भी बच्चों ने इसका फायदा उठाया। टाटा स्काई और एयरटेल टीवी से भी समझौता किया गया था।  राज्यों से हर दिन 4 घंटे की सामग्री मांगी गई है।

ग्रामीण क्षेत्रो के लिए खास योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में काम की कमी ना आए और आमदनी का साधन मिले इसके लिए 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया जा रहा है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में वेलनेस सेंटरों को बढ़ावा दिया जाएगा। सभी जिला स्तर के अस्पतालों में संक्रामक रोगों से लड़ने की व्यवस्था  की जाएगी। लैब नेटवर्क मजबूत किए जाएंगे। सभी जिलों में प्रखंडस्तर पर एकीकृत लैब बनाए जाएंगे।

दिवालियापन की न्यूनतम सीमा बढ़ी

IBC से जुड़े मामलों को लेकर वित्त मंत्री ने अहम घोषणा की। दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के लिए थ्रेसहोल्ड को एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाएगा। कोरोना वायरस की वजह से बकाया कर्ज को Default में शामिल नहीं किया जाएगा। अगले एक साल तक कोई भी नई इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। MSMEs के लिए विशेष दिवालिया समाधान ढांचा को जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।

भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी घोषणा

वित्त मंत्री ने बताया कि नए, आत्मनिर्भर भारत के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज पॉलिसी है । छोटे तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक को आपराधिक सूची से हटा दिया जाएगा। सीएसआर रिपोर्टिंग में कोई कमी रह गई या बोर्ड रिपोर्ट में छोटी मोटी कमी रह गई, फाइलिंग के समय डिफॉल्ट हो गया, एजीएम में देरी हो गई… इन सबको आपराधिकरण की सूची से हटा दिया गया है। इससे न्यायालयों पर भी दबाव कम होगा। 7 कंपाउडेबल ऑफेंस को खत्म कर दिया गया है। निजी कंपनियां अब विदेशों में शेयरों को सीधे सूचीबद्ध करा सकती हैं।

निजी क्षेत्रों के लिए खोले गए सभी सेक्टर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी सेक्टर्स को निजी क्षेत्रों को खोला जाएगा। रणनीतिक क्षेत्र में कम से कम एक सार्वजनिक उप्रकम भी बने रहेंगे, लेकिन इनकी अधिकतम संख्या 4 होगी। यदि चार से अधिक सार्वजनिक उक्रम हैं तो उनका विलय किया जाएगा। भारत और दुनिया में कुछ दशकों में बड़े बदलाव आए हैं। सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर भी नई नीति की जरूरत है। जनहित, राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर स्ट्रैटिजिक सेक्टर की एक लिस्ट बनाई जाएगी। इससे बाहर जो कंपनियां रह जाएंगी उनके निजीकरण का मौका दिया जाएगा, विलय किया जाएगा। पीएसई के निजीकरण का सही समय पर देखकर फैसला किया जाएगा। रणनीतिक क्षेत्रों में कम से कम एक सरकारी उपक्रम बना रहेगा।

राज्यों को कोरोना मदद

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों की सहायता कर रही है, जिससे वे करोना कि लड़ाई लड़ सकें। उन्होंने बताया कि अप्रैल महीने में राज्यों को 46038 करोड़ रुपए दिए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को करोना से लडने के लिए 4113 करोड़ रुपए दिए। 12390 करोड़ राजस्व घाटा ग्रांट समय पर राज्यों को दिए गए। स्टेट डिजास्टर रिलीज फंड के तहत अप्रैल के पहले सप्ताह में 11092 करोड़ रुपए राज्यों को दिए गए। उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्यों को जीडीपी के पांच फीसद के बराबर कर्ज उठाने की मंजूरी दी।

पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पिछले चार दिनों से आर्थिक पैकेज की बारीकियों को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझा रही हैं और बड़े सुधारों की घोषणाएं कर रही हैं। इससे पहले वित्त मंत्री ने शनिवार को चौथी किस्त की घोषणा की। इसमें कोयला, रक्षा विनिर्माण, विमानन, अंतरिक्ष, बिजली वितरण आदि क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों पर जोर रहा।