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विश्व गर्भनिरोधक दिवस

विश्व गर्भनिरोधक दिवस हर साल 26 सितंबर को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ दुनिया भर के विभिन्न चिकित्सीय संस्थान और गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) भी इस दिन को अपना समर्थन देते हैं। विश्व गर्भनिरोधक दिवस (कॉन्ट्रासेप्शन डे) का मकसद गर्भनिरोधक के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है और साथ ही युवाओं को उनके यौन और प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर बेहतर विकल्प चुनने के लिए सक्षम बनाना है।

भारत में यूं तो 1952 में ही परिवार नियोजन कार्यक्रम को लागू कर दिया गया था। लेकिन 1977 में नई बर्थ कंट्रोल पॉलिसी जनता पार्टी सरकार ने लागू की। इमर्जेंसी में परिवार नियोजन कार्यक्रम की आलोचना के बाद जनता पार्टी ने इस नीति के जरिए चलाने जाने वाले कार्यक्रम का नाम बदलकर उसे परिवार कल्याण कार्यक्रम कर दिया।

गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग से अनचाहे गर्भ से बचा जा सकता है। अनचाहे गर्भ से जहां माताओं को बच्चों के बेहतर देखभाल में मुश्किलें आती हैं, वहीं इससे माता व शिशु के स्वास्थ्य प्रभावित होने के ख़तरे भी बढ़ जाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में 21 करोड़ से अधिक महिलाएं अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं। लेकिन तब भी उनके द्वारा किसी गर्भ निरोधक साधन का उपयोग नहीं किया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए बड़ी आबादी को जागरूक करने के लिए 2007 से हर वर्ष 26 सितंबर को विश्व गर्भ निरोध दिवस मनाया जाता है।