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कोविड को हराएगा ये पंखे वाला मास्क

FAN-MASK

आईआईटी खड़गपुर और आईआईएम कोलकाता के पूर्व छात्र 60 वर्षीय ओड़िया पुरुष पीयूष अग्रवाल ने एक ऐसा मास्क तैयार किया है जो साँस लेने के लिए आरामदायक है। इसमें दो छोटे पंखे लगें हैं जो साँस लेने और साँस छोड़ने में मददगार हैं। इसकी लम्बाई और चौड़ाई क्रमशः 3 सेंटीमीटर है। उनके मास्क ब्रांड का नाम ‘Moksha- the mask that breathes’ है। अग्रवाल अपना PQR टेक्नोलॉजी उद्यम चला रहें हैं। उनके उद्यम ने Centre for Augmenting WAR with COVID-19 Health Crisis (CAWAC) मास्क परियोजना के तहत केंद्र से 50 लाख रूपए की मदद मिली है। वह इसके लिए आईआईटी दिल्ली के साथ काम कर रहे हैं।

वह अपना उद्यम नयी दिल्ली से चला रहें हैं, जो वाहनों में जीपीएस लगाता है और मास्क भी बनाता है। उन्होंने कहा “मैं दिल्ली में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर चिंतित था। इसलिए मैं स्वच्छ हवा में आसानी लेने के लिए मास्क बनाने की कोशिश कर रहा था। अब कोविड की स्थिति ने हमें इस विचार के साथ जाने और एक अनोखा मास्क के साथ आने के लिए मजबूर किया।” अग्रवाल मूलतः भद्रक जिले के चारमपा के मूल निवासी हैं।

उन्होंने कहा कि मास्क के दोनों किनारों पर दो छोटे पंखे हैं। ये पंखे लिथियम आयन बैटरी द्वारा संचालित होते हैं। इन पंखों में से एक साँस जाने के लिए हवा को फ़िल्टर करता है, जबकि दूसरा यूजर्स द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के लिए निकास पंखे की तरह काम करता है। यह मास्क पीएम 2.5 और अन्य हकनिकारक कणों, रोगजनकों और धूल से बचाने में मदद करता है। बैटरी कई पावर स्रोतों से चल सकती है जैसे की बैटरी बैंक, लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन का युएसबी पोर्ट।

इस मास्क की कीमत 2200 से 3000 रूपए की बीच है। यह मास्क लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल है। यूजर्स, फ़िल्टर के फंक्शनिंग को ध्यान में रखते हुए एक नियमित अंतराल में मास्क के फ़िल्टर को बदल सकते हैं। कॉर्ड के माध्यम से मास्क में पंखों के लिए कनेक्शन के साथ बैटरी को कमर या बांह के पास रखा जा सकता है। एक बार चार्ज करने पर बैटरी में पावर आठ घंटे तक चलेगी। इसका उपयोग चलने, जॉगिंग और दौड़ने के दौरान भी किया जा सकता है।