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1 किलो दूध से 10 किलो पनीर निकालने आ रहें हैं दिलजीत दोसांझ और मनोज बाजपाई

दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpai), अन्नू कपूर (Annu Kapoor) और फातिमा सना शेख (Fatima Sana Shaikh) की फिल्म ‘सूरज पे मंगल भारी’ (Suraj Pe Mangal Bhari) का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। फिल्म के नाम के अनुसार सूरज दिलजीत है और मंगल मनोज बाजपाई। इस फिल्म में हमें इन दोनों के बीच का घमासान देखने को मिलेगा जो 90’s के समय पर आधारित है। जी-स्टूडियो के बैनर तले बनी इस फिल्म में दिलजीत से लेकर मनोज बाजपेयी और अन्नू कपूर की एक्टिंग वाकई तारीफ के लायक है।

फिल्म का ये ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आ रहा है। फिल्म में दिलजीत अपने परिवार के साथ लड़की देखने जाते है और वही जब एक लड़की का परिवार दिलजीत की शराब पीते हुए फोटो देखते हुए कहते है “भाई साहब आप तोह कहते थे की आपके बेटे में कोई बुरी आदत नहीं है , फिर ये क्या है”. यहीं से फिल्म में एंट्री होती है मनोज बाजपाई की जो फिल्म में रिश्ता तुड़वाने का काम करते है। इसी के बाद दोनों के बीच टशन शुरू होता है और पूरी फिल्म इसी टशन के बीच होते कॉमेडी पर आधारित है।

फिल्म में मनोज बाजपेयी मधुर मंगल राणे का किरदार अदा कर रहे हैं, जिनकी कमाई का जरिया ही दूल्हों की जासूसी करना है। फिल्म में फातिमा सना शेख की बात करें तो वह एक मराठी मुल्गी के किरदार में दिखाई दी हैं, जो शर्तों पर अपना जीवन जीती हैं और उनका परिवार उन्हें शादी के बंधन में बंधता हुआ देखना चाहता है।

फिल्म में दर्शकों को लुभाने के लिए दिलजीत दोसांझ जहां अपने साथ नई पंचलाइन लेकर आए हैं तो वहीं फातिमा सना शेख भी फिल्म में अलग ही अंदाज में नजर आ रही हैं। खास बात तो यह है कि सूरज पर मंगल भारी के इस ट्रेलर को अब तक 10 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है।

फिल्म में बाकी कलाकार के रूप में फातिमा सना शेख , अनु कपूर, सुप्रिया पिलगाओंकर मनोज बाजपाई की बहन , पिता, और माँ के किरदार में है। फिल्म और भाई कई बड़े कलाकार दिखयेंगे। अभिषेक शर्मा ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया है। फिल्म दर्शाकों को कैसी लगती है ये तो फिल्म रिलीज़ होने के बाद ही पता चलेगी। ‘सूरज पे मंगल भारी’ (Suraj Pe Mangal Bhari) फिल्म 1995 के बॉम्बे में सेट की गयी है, निर्देशक ने उस वक्त के बॉम्बे शहर को बखूबी से परदे पर उतारा है। फिल्म में 90 के दशक की कारों से लेकर बैकग्राउंड म्यूजिक तक जो 90 के दशक की हिंदी फिल्मों का ट्रेडमार्क रही है इस फिल्म के जरिये याद दिलाएगी।