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काला पानी के उस काले कोट का लाजवाब सफर

अपने ज़माने के सुपरस्टार और अपनी अदाओं से घायल करने वाले ‘देव आनंद’ की आज पुण्यतिथि है। देव आनंद, भारतीय सिनेमा के बहुत मशहूर अभिनेता थे। उनका लंदन के द वाशिंगटन मेफेयर होटल में 88 वर्ष की आयु में 3 दिसंबर, 2011 को कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था। यह भारतीय सिनेमा की दुनिया में बहुत दुखद दिन था। उनकी मौत उनकी आखिरी फिल्म ‘चार्जशीट’ की रिलीज के कुछ महीने बाद हुई थी। आनंद अपने मौत के समय कथित तौर पर मेडिकल चेकअप के लिए लंदन में थे। 10 दिसंबर को, उनकी अंतिम संस्कार सेवा, लंदन के एक छोटे चैपल में आयोजित की गई थी, जिसके बाद उनके ताबूत को दक्षिण-पश्चिम लंदन के Putney Vale Crematorium में ले जाया गया था। उनकी राख को गोदावरी नदी में विसर्जन के लिए भारत लाया गया था।

देव आनंद से जुड़े कुछ तथ्य :

➯देव आनंद का पूरा नाम ‘धरमदेव पिशोरीमल आनंद’ था।
➯उन्होंने अभिनेता बनने से पहले मिलिट्री सेंसर ऑफिस में भी काम किया और रु160 कमाया।
➯बतौर हीरो देव आनंद की पहली फिल्म 1946 में आई ‘हम एक हैं’ थी।
➯वह एक भारतीय फिल्म अभिनेता, लेखक, निर्देशक और निर्माता थे, जो हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते है, उन्होंने छह दशक तक दर्शकों पर अपने हुनर का जादू बिखेरा।
➯देव आनंद की हिट फिल्म ‘काला पानी’ के बाद, अभिनेता को सार्वजनिक रूप से एक काला सूट नहीं पहनने के लिए कहा गया था क्योंकि महिलाएँ उन्हें काले कपड़े पहने देखकर इमारतों से कूद जाती थीं ।
➯देव ने ‘सुरैया’ को 3,000 रुपये की हीरे की अंगूठी के साथ प्रपोज किया था, लेकिन सुरैया की नानी अंतर-धार्मिक रोमांस के प्रबल विरोधी थीं। सुरैया जीवन भर अविवाहित हीं रहीं।
➯1954 में देव आनंद ने मशहूर अभिनेत्री ‘कल्पना कार्तिक’ से शादी कर ली।
➯उनके गर्दन झुकाने का वो गजब अंदाज लड़कियों को उनका दीवाना बना देता था।
➯इस दिग्गज अभिनेता के प्रतिष्ठित, फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ में पहनी गई प्रिंटेड कैप कथित तौर पर कोपेनहेगन, डेनमार्क में एक दुकान से खरीदी गई थी।
➯उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में सबसे महान और सबसे सफल अभिनेताओं में से एक माना जाता है।
➯देव ने 1949 में अपनी खुद की कंपनी’ नवकेतन फिल्म्स’ लॉन्च की।
➯1977 में उन्होंने एक राजनितिक दल नेशनल पार्टी ऑफ़ इंडिया का निर्माण किया, जो की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के खिलाफ था।
➯2007 में, उनके जन्मदिन के शुभ अवसर पर उनकी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ रिलीज़ हुई।
➯उन्हें सिनेमा में सहयोग के लिए सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।