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बांस से बने Cookies की खासियत हैरान करने वाली

आटा और बटर का कुकीज तो हर किसी ने खाया है, लेकिन क्या आपने कभी बांस से बना हुआ कुकीज खाया हैं? त्रिपुरा में पहली बार बांस के पेड़ की शाखाओं को दरदरा करके और प्रोसेसिंग के बाद इस कुकीज को बनाया गया है। बांस से बनी कुकीज की मांग पूर्वोत्तर भारत, नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार, बंग्लादेश, जापान, चीन और ताइवान जैसे कई देशों में भी है।

बांस से बनी कुकीज में कैलोरी की मात्रा कम होती है। यह डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में भी मदद करती हैं। इसे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार ने लॉन्च किया है। इन कुकीज को बनाने के लिए बांस की शाखाओं में आटा और बटर मिलाया जाता है। बांस की शाखाओं में प्रोटीन, विटामिंस, फॉस्फोरस, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम और कैल्शियम की अधिक मात्रा होती है। इसमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरस और एंटी कैंसर गुण भी होते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करती हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने इसकी तस्वीरें ट्विटर पर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, ‘आज वर्ल्ड बैम्बू डे के मौके बैम्बू कुकीज और बांस से बनी हनी बॉटल लॉन्च की है। बैम्बू कुकीज और हनी बॉटल ​हमारे राज्य से ये दो नई चीजें जुड़ गई हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

बिस्किट बनाने के लिए त्रिपुरा में आसानी से मिलने वाली मूली और तेराई बैंबू जैसे बांस के वैरायटी का इस्तेमाल किया जाता है। इन कुकीज के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इसकी रैपिंग पारंपरिक हाथ से बने रैपर में होती है जिसे ‘रिसा’ कहा जाता है।