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खुद पर भरोसा कर मोती से चमकाई किस्मत

मोती हर किसी को आकर्षित करते हैं। कोई माला बनाता है तो कोई अंगुठी। और शायद यही आकर्षण बिहार के समस्तीपुर जिला अंतर्गत दलसिंहसराय प्रखंड के बुलाकीपुर गांव के दो युवाओं को ऐसा आकर्षित किया की उन्होने उसी मोती के उत्पादन की नई राह पर कदम बढ़ाने की ठानी। राजकुमार शर्मा और प्रणव कुमार कोरोना काल में अपनी रोजी-रोटी छोड़ यहां घर लौटे प्रवासियों को भी इसका प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की राह दिखा रहे हैं और इस क्षेत्र में सफलता का परचम तो लहरा रहें हैं।

राजकुमार शर्मा और प्रणव कुमार 2017 में जब अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ मोती की खेती शुरू की थी तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन कुछ नया करने की सोच लेकर उसने भुवनेश्वर और जयपुर में इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया। आज वो एक बड़े से पानी के टैंक में सीप डालकर मोती की खेती करते हैं। साथ ही इसका प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

ऐसे तैयार होते मोती

राजकुमार बताते हैं कि मोती उत्पादन के लिए सीमेंटेड पानी टैंक या तालाब की जरूरत पड़ती है। सीप (ओएस्टर) बाहर से मंगाया जाता है। सीप में छोटी सी सर्जरी कर भुवनेश्वर से मंगाया गया बीज (न्यूक्लियस) डाला जाता है। जालीदार बैग में पांच-छह सीप रखकर उसे तीन से चार फीट गहरे पानी में डाल देते हैं। पानी में पोषक तत्व बढ़ाने के लिए कैल्शियम और शैवाल भी डालते हैं। सीपों को मोती तैयार करने में लगभग 12 से 18 महीने लगते हैं।

लागत कम,ज्यादा मुनाफा

राजकुमार बताते हैं कि एक मोती के उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने में करीब 40 रुपये का खर्च आता है। उसी मोती को स्थानीय बाजार में तीन सौ से चार सौ रुपये तक में बेचा जाता है। यहां के मौसम के अनुकूल मोती की तीन किस्में केवीटी मोती, गोनट मोती और मेंटल टिश्यू का उत्पादन किया जाता है। मोती की खेती से ये दो लाख रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं। इसकी बिक्री स्थानीय बाजार सहित बाहर भी होती है।

प्रणव कुमार के अनुसार, एक सीप लगभग 10 से 15 रुपये तक मिलता है। वहीं बाजार में एक से 20 मिमी सीप की मोती की कीमत करीब तीन सौ से लेकर चार सौ रुपये तक होती है। आजकल डिजायनर मोतियों को बेहद पसंद किया जा रहा। सीप से मोती निकाल लेने के बाद मृत सीप को भी बाजार में बेचा जाता है। उस सीप से कई सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं। इनमें सीलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि प्रमुख हैं। राजकुमार कहते हैं कि इनपर भी काम करने की योजना है।