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बिहार की पहली महिला उपमुख्यमंत्री का राजनीतिक सफर

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भाजपा की रेणु देवी अब बिहार की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं। यह पहली बार है कि सातवीं बार चुने गए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बिहार सरकार के दो उप मुख्यमंत्री होंगे। एक जहां रेणु देवी हैं, तो दूसरे उपमुख्यमंत्री भाजपा की तारकिशोर प्रसाद हैं। रेणु, ‘नोनिया’ जाति (‘तेली’ के नाम से भी जाना जाता है) से ताल्लुक रखती है, जिसे बिहार की अति पिछड़ी जाति के रूप में पहचाना जाता है। उन्हें नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड का एक मजबूत वोट बैंक माना जाता है।

वह भाजपा विधायिका में पांचवें डिप्टी सीएम के रूप में चुनी गईं। रेणु देवी बहुत लंबे समय से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की महिला शाखा का नेतृत्व कर रही हैं। रेणु देवी इस बार बेतिया से पांचवीं बार बीजेपी विधायक के तौर पर चुनी गईं हैं। वह पहली बार साल 2000 में विधायक बनी थी और उसके बाद 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में भी उनहोंने जीत दर्ज की।

रेणु देवी ने अपना पहला चुनाव नौतन विधानसभा क्षेत्र से 1995 में भाजपा के टिकट पर लड़ा और एक मामूली अंतर से हार गईं। उसने 2000 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और 10000 मतों के अंतर से जीत हासिल की। 2007 के बिहार मंत्रिमंडल में उन्हें संस्कृति मंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया था। 2014 में रेणु देवी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था और उन्होंने अभी तक क्षमता में काम करना जारी रखा।

रेणु देवी का जन्म नवंबर 1959 में हुआ। वो अपना स्कूल खत्म करने के बाद आरएसएस से जुड़ गईं। उन्होंने संगठन में विभिन्न क्षमताओं में काम किया और उनकी भूमिका काफी हद तक बिहार-उत्तर प्रदेश क्षेत्र की थी। रेणु की मां भी संघ परिवार से जुड़ी थीं और उनके ननिहाल में भी बीजेपी और आरएसएस का प्रभाव रहा। 1988 में उन्हें वीएचपी दुर्गा वाहिनी- महिला विंग की जिला समन्वयक बनाया गया। रेणु देवी को बिहार की पुरुष प्रधान सरकार में बदलाव का चेहरा माना जा रहा है।