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मिसाइल मैन ‘एपीजे अब्दुल कलाम’

भारत के महान हस्ती एपीजे अब्दुल कलाम के प्रतिभा की दुनिया आज भी कायल है। वैज्ञानिक से राष्ट्रपति बने अब्दुल कलाम का जन्म आज ही के दिन रामेश्वरम के धनुष्कोडी में 1931 को हुआ। कलाम एक मध्यवर्गीय, संयुक्त परिवार में रहते थे। इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था, जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे और मछुआरों को नाव किराय पर देते थे। कलाम की ज़िन्दगी में उनके पिता का बहुत प्रभाव था। कलाम के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए उन्हें कम उम्र में ही काम करना पड़ा।

कलाम ने अपने आंरभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बारों के वितरण का काम भी किया है। अपने पढाई के प्रति जुनून के कारण कालम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से 1954 में आंतरिक विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिए भारतीय रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संस्थान में परिवेश किया। इन्होने डीआरडीओ तथा इसरो के एयरोस्पेस में इंजीनियर के रूप में काम किया।

अब्दुल कलाम ने देश के लिए अनेको योगदान दिए और अनेको बार उन्हें प्रसिद्धि प्राप्त हुई, परन्तु आज भी लोग उन्हें अग्नि और पृथ्वी नाम की मिसाइलो के विकास के लिये याद करते है। वे देश के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसअलवी- 3 के परियोजना निदेशक रहे है। उन्हें वर्ष 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वर्ष 2002 में कलाम देश के 11 वे राष्ट्रपति रहे। उन्होंने मील का पत्थर हासिल किया और देश के विकास के लिए बहुत योगदान दिया।

27 जुलाई 2015 को शिलांग में आईआईएम में व्याख्यान के दौरान इस महान इंसान का निधन हुआ । कलाम ने देश के युवाओं के लिए बहुत कुछ किया। उन्हें यकीन था की भारत के युवा बहुत ही प्रतिभाशाली है। कलाम ने कई प्रेरणादायी किताबें लिखी जिसमे विंग्स ऑफ़ फायर , इंडिया 2020, इग्नाइटेड माइंडस, टर्निंग पॉइंट्स, फ़ोर्डे योर फ्यूचर, टारगेट 3 बिलियन जैसे किताबे शामिल है। इन्होने देश की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।