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ये हैं कलयुग के कर्ण

azim premji

आईटी प्रमुख विप्रो के अजीम प्रेमजी FY20 में सबसे दानवीर भारतीय बनकर उभरे हैं और परोपकार की सूची में सबसे ऊपर हैं। EdelGive Hurun India Philanthropy List 2020 के अनुसार, उन्होंने एक दिन में 22 करोड़ रुपये और एक वर्ष में 7,904 करोड़ रुपये दान किए है। प्रेमजी की उदारता ने FY20 में कुल दान को 175 प्रतिशत बढ़ाकर 12,050 करोड़ रुपये कर दिया है। दानवीरों की इस पूरी सूची में 7 महिलाओं ने जगह हासिल की है, जिसमें रोहिणी नीलेकणी 47 करोड़ रुपये दान के साथ भारत की सबसे बड़ी दानवीर महिला बनी।

“अजीम प्रेमजी एंडोमेंट फंड, विप्रो में प्रमोटर की हिस्सेदारी का 13.6 प्रतिशत हिस्सा है और प्रमोटर शेयरों से अर्जित सभी धन प्राप्त करने का अधिकार है। 1 अप्रैल 2020 को, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन (1,000 करोड़ रु), विप्रो (100 करोड़ रु), और विप्रो एंटरप्राइजेज (INR 25 करोड़) ने कोविड -19 महामारी के प्रकोप से निपटने के लिए INR 1,125 करोड़ रुपए देने का कमिटमेंट किया। ये विप्रो की वार्षिक CSR गतिविधियों और अजीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के सामान्य परोपकारी खर्च के अलावा हैं।

इस लिस्ट में दूसरे नम्बर पर शिव नादर है, उन्होंने 795 करोड़ रुपये शिक्षा के क्षेत्र में दान किए हैं। तीसरे नंबर पर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी है, जिन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए 458 करोड़ रुपये दान किए हैं। सूची में चौथे नंबर पर कुमार मंगलम बिरला ने शिक्षा के लिए 276 करोड़ रुपये दान किए जबकि पांचवें नम्बर पर अनिल अग्रवाल 215 करोड़ रुपये दान किए हैं। अजय पिरामल 196 करोड़ रुपये के साथ छठे नम्बर पर और नंदन निलकनी और हिन्दूजा ब्रदर्ज क्रमशः 196 और 159 करोड़ रुपये के साथ सातवें व आठवें नम्बर पर आए हैं। अडानी ग्रुप के गौतम अडानी 88 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष नौ और राहुल बजाज 74 करोड़ रुपये के साथ दसवें नम्बर पर आए हैं।

75 वर्षीय अजीम प्रेमजी ने एक विविध समूह में वनस्पति तेल बनाने वाली कंपनी से विप्रो का रूपांतरण किया। भारत के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक, उन्होंने अपने धन का एक बड़ा हिस्सा परोपकारी कार्यों के लिए दान कर दिया। वर्ष 2020 तक अपने पिता के सबसे दानवीर भारतीय के रूप में उभरने के बाद, ऋषद प्रेमजी ने अपने पिता के धन के बारे में उनके कुछ फिलॉसफी को साझा करने के लिए ट्विटर पर ट्वीट किया “मेरे पिता ने हमेशा माना है कि वह अपनी संपत्ति के ट्रस्टी थे और कभी भी इसके मालिक नही है। जिन समुदायों में हम रहते हैं और काम करते हैं, उनका हिस्सा होना भी विप्रो का एक मुख्य हिस्सा है।”