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अब पहली बार रसोईघरों की खुशबू भारत की खेतो में

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां के रसोईघरों से हींग की खुशबू न आती हो। दुनिया के महंगे मसालों में से एक में हींग का भी ज़िक्र है। पुराने समय से हींग भारतीय पकवानों में व्यापक रूप से उपयोग किये जाने वाले मसालों में से एक है। ताज़्ज़ुब की बात ये है की भारत में पूरी दुनिया की करीब 40 फीसदी हींग की खपत होती है और फिर भी भारत में हींग की खेती नहीं होती है। भारत में खाड़ी देशों (Gulf country) से हींग का एक्सपोर्ट किया जाता है।

भारत में पहली बार हींग उगाई जा रही है । CSIR Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur (IHBT) ने एक मिशन के तहत भारत के हिमालयी क्षेत्र में इसकी खेती शुरू कर रहे हैं। हींग के पहले पौधे को हिमाचल प्रदेश के लाहौल घाटी के क्वारिंग गांव में लगाया गया है। सीएसआईआर के डायरेक्टर जनरल (DG, CSIR) डॉ. शेखर मांडे कहते हैं कि हींग उगाने के लिए 2016 से ही रिसर्च की जा रही थी। भारत हर साल 600 करोड़ रुपए की हींग अफगानिस्तान, ईरान और उजबेकिस्तान सहित मध्य एशिया के विभिन्न देशों से काम से काम 1200 टन हींग आयात करता है।

भारत में हींग को कई नामों से जाना जाता है। इसे तमिल भाषा में पेरुंगायम, तेलगु में इंगुवा, मराठी में हींगा, मलयालम में कायम, कश्मीर में यांग के नाम से जाना जाता है। हींग एक बारहमासी पौधा है और यह रोपने के पांच साल बाद जड़ों से ओलियो गम का उत्पादन करता है। इसे ठन्डे रेगिस्तानी क्षेत्रों की अनुपयोगी ढलान वाली भूमि में उगाया जाता है। कच्ची हींग का स्वाद लहसुन जैसा होता है। हींग का उपयोग करी, सॉसों व अचारों में सुगन्ध लाने के लिए होता है। हींग में कई औषद्यीय गुण होते हैं और ये खासतौर पर पाचन में सुधर लेन में उपयोगी है। आमतौर पर इसका पौधा 4 मीटर तक बढ़ सकता है।

CSIR Institute of Himalayan Bioresource Technology ने National Bureau of Plant Genetic Resources, New Delhi से हींग के छह उपकरण को पेश किये हैं जिसका उत्पादन प्रोटोकॉल भारतीय परिस्थिति में मानविकीकरण किया गया है। हींग के पौधे को उगाने में अभी कई चुनौतियां आ रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बीज से अंकुरित होने की दर केवल एक फीसदी है। खैर, हींग की खेती से आयात काम होने से देश के अर्थव्यस्था को काफी फायदा होगा।