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इस राज्य में खुल रहा है भारत का पहला ‘सैंड ड्यून पार्क’, जानिए क्या है खास

गोवा में वर्ल्ड बैंक के समर्थन से भारत का पहला ‘सैंड ड्यून पार्क’ खोला जायेगा। वर्ल्ड बैंक ने राज्य के ‘बायोडायवर्सिटी बोर्ड’ के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और अपने कोस्टल जोन मैनेजमेंट प्लान के हिस्से रूप में परियोजना के लिए 3 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी गोवा के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और राज्य के अन्य सम्बंधित अधिकारियों से राज्य के सैंड ड्यून इकोसिस्टम को बहाल करने और पुनजीवित करने के लिए तत्काल उपाय करने का आग्रह किया है।

इस योजना के प्रयासों के तहत, बालू की वनस्पतियों के ख़त्म होने की सम्भावना को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों का उपयोग करके पुलों का निर्माण किया जायेगा। इस योजना में सैंड ड्यून वनस्पति की नर्सरियों की स्थापना भी शामिल है, जो समुद्र तट पर इसकी रिप्लांटेशन की अनुमति देगा, जहाँ से वनस्पतियां पूरी तरह से मिट गयी है। ‘मोरजिम और गैलीबाग़’ समुद्र तट को सैंड ड्यून पार्क बनाने के लिए प्रस्तावित किया गया है।

यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था को लाभान्वित करने के साथ- साथ सैंड ड्यून इकोसिस्टम के बारे में जागरूकता पैदा करने में रचनात्मक भूमिका निभाएगा। दुनियाभर में कई ऐसे सैंड ड्यून पार्क हैं, जैसे की अमेरिका में ग्रेट सैंड ड्यून नेशनल पार्क है, जिनमें से कुछ लाखों वर्षों से वापस जा रही जटिल भुगभर्भिक कहानियां है। ड्यून मैनेजमेंट में, एरोडेड क्षेत्रों को बहाल करना और दूसरों को वनस्पति और बाड़ का उपयोग करके स्थिर करना शामिल है ताकि वे ड्यून बनाने की प्रक्रिया में इकोसिस्टम के संरक्षण में मदद कर सके।

सैंड ड्यून बालू के छोटे-छोटे टीले होते है जो समान्यतः रेतीले रेगिस्तानों या रेतीले समुद्र तटों में देखने को मिलते हैं। इन्हे बनने में कई वर्ष लगते हैं, ये हवा में उड़ती रेत के समुद्र तट की घास या अन्य स्थिर वस्तुओं में फंस कर एकत्र होने से बनते हैं। समुद्रतटीय सैंड ड्यून समुद्र तट से स्थल की ओर चलने वाली हवाओं की Aeolian क्रिया से बने कम ऊंचाई वाले सैंड ड्यून होते हैं जो ज्वार से प्रभावित समुद्र तट से कुछ पीछे स्थित होते हैं। ड्यून बेल्ट्स प्राकृतिक घटनाओं जैसे सुनामी, तूफ़ान, आदि से रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में काम करते हैं और यह पानी, समुद्र तट और मानव बस्तियों के बीच एक सुरक्षित इंटरफ़ेस बनाते हैं।